अहमदाबाद: वर्ष 2002 के गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी नरसंहार मामले में अभियोजन ने हमले को बर्बर तथा अमानवीय बताते हुए सभी 24 दोषियों को मौत की सजा या मृत्यु तक कैद की मांग की। वहीं विशेष अदालत ने सजा के बारे में आगे की सुनवाई नौ जून तक टाल दी। अभियोजन ने अधिकतम सजा की मांग करते हुए कहा कि अदालत मृत्युदंड के बारे में विचार कर सकती है या अभियुक्तों को आखिरी सांस तक जेल में रखे जाने का आदेश दे सकती है।
सजा के बारे में दलीलें ढाई घंटे से भी ज्यादा समय तक जारी रहने पर भी अपूर्ण रही और विशेष एसआईटी अदालत के न्यायाधीश पी बी देसाई ने सुनवाई गुरूवार तक स्थगित कर दी। शुक्रवार को अदालत ने मामले में 24 आरोपियों को दोषी करार दिया था जबकि 36 अन्य को बरी कर दिया था। गोधरा मामले के बाद हुयी इस घटना में 29 फरवरी 2002 को 69 लोगों की मौत हो गई थी जिनमें कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी शामिल थे। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इस नरसंहार की देश भर में व्यापक चर्चा हुई थी और करीब 400 लोगों की भीड़ ने अहमदाबाद के बीचोंबीच स्थित हाउसिंग सोसाइटी पर हमला कर निवासियों की जान ले ली थी।
यह 2002 के दंगों के उन नौ मामलों में से एक था जिनकी जांच उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने की थी। कुल 66 आरोपियों में से छह की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। दोषी ठहराए गए 24 आरोपियों में से 11 को हत्या के लिए दोषी ठहराया गया है जबकि विहिप नेता अतुल वैद्य सहित 13 अन्य को कमतर अपराधों में दोषी ठहराया गया है।
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