आजादी से 24 दिन पहले देश ने अपना तिरंगा:
पिंगाली द्वारा तैयार किए गए इस झंडे को अपनाने के लिए भारत में साल 1931 को एक प्रस्ताव पारित हुआ। लेकिन झंडे में एक संशोधन हुआ। लाल रंग को हटाकर केसरिया रंग का चयन हुआ। वहीं एक और संशोधन में चरखे को हटाकर सम्राट अशोक के धर्मचक्र को स्थान दिया गया। इतनी मेहनत के बाद 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा में इसे राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपना लिया गया।
मौत के चार दशक बाद पिंगाली को मिला सम्मान:
देश को इतना नायाब तोहफा देने वाले पिंगाली को जीते जी इसका सम्मान हासिल नहीं हुआ। इतने बड़े योगदान के बावजूद वो लगभग गुमनाम ही रहे। साल 1963 में विजयवाड़ा की एक छोटी सी झोपड़ी में उनका देहांत हो गया। पिंगाली की मौत के काफी सालों बाद सरकार को उनकी सुध आई और साल 2009 में उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी हुआ, जिसमें उनकी फोटो भी थी। जनवरी 2016 में भाजपा नेता वेंकैया नायडू ने विजयवाड़ा स्थित ऑल इंडिया रेडियो की बिल्डिंग में उनकी एक मूर्ति लगवाई।
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