नई दिल्ली: Odd और Even के नए नियमों से दिल्ली की सीएनजी गाड़ियों को भले ही दूर रखा गया हो, लेकिन इसके लिए भी इन्हें सीएनजी स्टीकर लेना होगा। स्टीकर पाने के लिए सीएनजी पंपों पर लंबी लंबी कतारें लग रही हैं। तमाम नियम और शर्तों के साथ बांटे जा रहे सामान्य से सीएनजी स्टीकर को पाना भी अब दिल्ली की प्राइवेट गाड़ियों के लिए मुसीबत का सबब बनता नजर आ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली में चल रहीं सभी सीएनजी गाड़ियों में एक जनवरी से पहले पहले ऐसे स्टीकर चस्पा किए जाने हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह संभव नजर नहीं आ रहा है। जानिए सीएनजी स्टीकर पाने में क्या हैं बड़े पेंच।
दिल्ली में सिर्फ 95 सीएनजी पंप:
राजधानी दिल्ली में सिर्फ 95 सीएनजी पंप ही है जहां पर सीएनजी वाहन चालक अपनी गाड़िया रिफिल करवाते हैं और इस दौरान ही उन्हें सीएनजी स्टीकर दिया जा रह है, लेकिन अगर यह मान भी लिया जाए कि हर सीएनजी गाड़ी को स्टीकर दिया जाएगा तो भी 1 जनवरी से पहले हर गाड़ी में स्टीकर लगना संभव नही है क्योंकि दिल्ली में कुल मिलाकर 5 लाख के आसपास ऐसी गाड़िया हैं। अगर आप हर गाड़ी को चेक करके स्टीकर बाटेंगे तो पंप पर लंबी-लंबी लाइनें लग जाएंगी फिर भी पांच लाख गाड़ियों में स्टीकर नहीं लग पाना संभव नहीं है। जानकारी के मुताबिक बीते मंगलवार को शाम 4 बजे तक सिर्फ तीन हजार स्टीकर ही बंट पाए थे।
चेक की जाती है compliance plates:
फिलहाल जिस तरह से दिल्ली की गाड़ियों में CNG स्टीकर बाटे जा रहे हैं उसके तहत compliance plates देखी जा रही हैं। हर कार को चार लोग चेक करते हैं। कार का हुड उठाकर गैस सिलेंडर की compliance plates को अच्छे से चेक किया जाता है। इस प्लेट में यह चेक किया जाता है कि कहीं सिलेंडर की वैधता ने तीन साल की समयावधि को पार तो नहीं कर दिया है। अगर आपकी गाड़ी के सिलेंडर ने तीन साल की वैधता सीमा को पार कर दिया है तो आपको फिर से वैधता प्रमाणपत्र लेने के लिए दो से तीन हजार रुपए चेकिंग सेंटर को देने होंगे। लेकिन साल 2013 में जब compliance plates को Mandatory किया गया था तब यह कहा गया था कि यह चेकिंग मुफ्त में की जाएगी। दिलचस्प पहलू यह भी है कि दिल्ली में इतने चेकिंग सेंटर भी नहीं है जो दो दिन के भीतर सभी गाड़ियों को पुराने सिलेंडर की जांच कर पाएं।
अगर आपको भी अपनी गाड़ी के सिलेंडर की जांच करवानी है तो जानिए देश में कितने टेस्टिंग सेंटर हैं।
टेस्टिंग सेंटर: पूरे देश सिर्फ 96 टेस्टिंग सेंटर हैं
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