नई दिल्ली: सरकार आतंकवाद से निपटने के लिए नया कानून ला सकती है। इसके लिए जल्द ही कैबिनेट नोट लाने की तैयारी हो रही है। 14 अगस्त को होम मिनिस्ट्री में इसी मामले पर हाईलेवल मीटिंग बुलाई गई है। मीटिंग में कैबिनेट नोट पर चर्चा की जाएगी। इस कैबिनेट नोट के लिए सरकार ने IB, CBI, NIA और NTRO (नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनेइजेशन) से सुझाव मांगे हैं। इसके अलावा विदेश मंत्रालय से भी सलाह मांगी गई है। बताया जा रहा है कि देश की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने सरकार को कुछ सुझाव दिए भी हैं जिन्हें कैबिनेट नोट के ड्राफ्ट में शामिल किया जा सकता है।toughen laws against terror, security agencies have asked for suggestions
आतंकवाद के खिलाफ कडे कानून बनाने के लिए इन सुझावों पर गौर किया जा सकता है-
- आरोपी का प्री डिटेंशन पीरियड 24 घंटे से बढाकर 48 घंटे किया जाए..ये वो वक्त होता है जब आतंक के आरोपी को जांच एजेंसी कोर्ट में पेश करने से पहले अपनी कस्टडी में रखती है।
- इंवेस्टिगेशन आफिसर के आगे दिए गए आरोपी के बयान को कोर्ट में मान्य समझा जाए।
- एंटी टेरर एजेंसीज के लिए टेरीटोरियल बाउंडेशन खत्म की जाएं। इसका सीधा मतलब ये कि एजेंसियों को कार्यवाही के लिए राज्य सरकार की अनुमति ना लेनी पड़े।
- आतंक के मामलों में एनआईए को सीधे स्पॉट पर पहुंचकर कार्यवाही का अधिकार दिया जाए।
- एक यूनिफाइड कमांड सिस्टम बनाया जाए जिसके तहत अलग अलग एजेंसियां एक छत के नीचे काम करें।
- दूसरे देशों से एविडेंस जुटाने के तरीकों पर चर्च, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए दूसरे देश में बैठे हुए आरोपी के बयान को स्वीकार किया जाए।
- दूसरे देशों के साथ लीगल असिस्टेंस ट्रीटी के प्रावधानों पर चर्चा।
- साइबर टेरिरिज्म पर कड़े प्रावधान की बात।
- 9. आतंक की प्लानिंग को रोकने के लिए अलग से प्रोविजन।
- 10. इस पर भी चर्चा होगी कि मौजूदा आतंकरोधी कानून Unlawful Activities Prevention Act में ही जरूरी संशोधन किए जाएं, या अलग से नया आतंक रोधी कानून लाया जाए।
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