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पूरे देश में आज ट्रेड यूनियनों की हड़ताल, करोड़ों श्रमिक होंगे शामिल

नयी दिल्ली: ट्रेड यूनियनों की आज देशव्यापी हड़ताल है जिससे बैंकिंग, सार्वजनिक परिवहन और दूरसंचार जैसी आवश्यक सेवाएं शामिल हैं। दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने बेहतर वेतन और अन्य सुविधाओं पर सरकार के उदासीन रवैये

Strike trade unions- India TV Hindi
Strike trade unions

नयी दिल्ली: ट्रेड यूनियनों की आज देशव्यापी हड़ताल है जिससे बैंकिंग, सार्वजनिक परिवहन और दूरसंचार जैसी आवश्यक सेवाएं शामिल हैं। दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने बेहतर वेतन और अन्य सुविधाओं पर सरकार के उदासीन रवैये तथा श्रम कानूनों में श्रमिक विरोधी बदलाव के विरोध में एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) को छोड़कर अन्य सभी यूनियनों ने हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है। यूनियनों ने सरकार के उनकी मांगों पर विचार के आश्वासन तथा दो साल के बोनस की हालिया घोषणा और न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी को पूरी तरह नाकाफी बताया है।

ट्रेड यूनियन नेताओं ने दावा किया है कि इस साल की हड़ताल अधिक व्यापक होगी क्योंकि हड़ताल में शामिल कर्मचारियों की संख्या 18 करोड़ पर पहुंच जाएगी। पिछले साल 2 सितंबर की हड़ताल में 14 करोड़ श्रमिक शामिल हुए थे। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने उनकी 12 सूत्रीय मांगों पर सरकार के उदासीन रवैये के खिलाफ हड़ताल पर जाने का आह्वान किया है। उनकी प्रमुख मांगों में न्यूनतम मासिक वेतन 18,000 रपये करने, महंगाई पर काबू पाना तथा 3,000 रपये की निश्चित न्यूनतम मासिक पेंशन की मांग शामिल हैं।

ट्रेड यूनियन संयोजन समिति (टीयूसीसी) के महासचिव एस पी तिवारी ने पीटीआई भाषा से कहा, इस बार हड़ताल अधिक बड़ी होगी। औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र के करीब 18 करोड़ श्रमिक सरकार के उदासीन रवैये के विरोध में सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने कहा कि हड़ताल से बंदरगाह और नागर विमानन सहित आवश्यक सेवाएं मसलन परिवहन, दूरसंचार और बैंकिंग बुरी तरह प्रभावित होंगे। अस्पतालों और बिजली संयंत्रों के कर्मचारी भी हड़ताल पर रहेंगे लेकिन इससे वहां सामान्य कामकाज प्रभावित नहीं होगा।

आल इंडिया ट्रेड यूनियंस कांग्रेस और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस जैसे संगठनों ने हड़ताल नहीं करने की सरकार की अपील को ठुकरा दिया था। इन संगठनों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को पूरा करने में नाकाम रही है। इन संगठनों की आपत्ति बीमा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश के नियमों के शिथिल करने को लेकर है। घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करने की योजना का भी श्रमिक संगठन विरोध कर रहे हैं।

उधर केंद्र ने सभी मंत्रालयों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि हड़ताल से सार्वजनिक सुविधाएं ओर अनिवार्य सेवाएं प्रभावित नहीं होने पाएं। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सभी सरकारी विभागों के सचिवों से कहा गया है कि वे प्रभावी उपाय करें जिससे उनके मंत्रालय के तहत आने वाली विभिन्न सेवाएं सुगमता से चलती रहें।

श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने मुंबई में संवाददाताओं से बातचीत में श्रमिकों के समक्ष आ रहे मुद्दों के लिए पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सरकार श्रमिक यूनियनों से टकराव नहीं चाहती, बल्कि वह उनका सहयोग और समर्थन चाहती है। दत्तात्रेय ने कहा कि हड़ताल से बीमा और बैंकिंग और बीमा क्षेत्र अधिक प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियनों की 12 मांगों में से आठ श्रम विभाग से संबंधित हैं और इनमें से सात पर सहमति बन चुकी है। इन सात मांगों में वेतन संशोधन, श्रमिकों को 10,000 से 21,000 रपये तक का बोनस और सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों मसलन कोल इंडिया, गेल, ओएनजीसी, एनटीपीसी, ओआईएल, एचएएल तथा भेल के कर्मचारी भी आज  हड़ताल पर रहेंगे। सार्वजनिक क्षेत्र के कई बैंकों सहित इनमें से कई कंपनियों ने कहा है कि हड़ताल से उनका कामकाज प्रभावित हो सकता है।

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