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स्कूली बच्चे की हत्या में 2 छात्रों को फांसी की सजा

नागपुर की एक सत्र अदालत ने दो वर्ष पहले आठ वर्षीय एक मासूम को अगवा करने और उसकी हत्या के मामले में दो छात्रों को गुरुवार को दोषी ठहराया और उन्हें मौत की सजा सुनाई।

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नागपुर: नागपुर की एक सत्र अदालत ने दो वर्ष पहले आठ वर्षीय एक मासूम को अगवा करने और उसकी हत्या के मामले में दो छात्रों को गुरुवार को दोषी ठहराया और उन्हें मौत की सजा सुनाई। सत्र न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश किशोर के.सोनावाने ने राजेश डी.दावड़े (19) और उसके मित्र अरविंद ए.सिंह (23) को मौत की सजा सुनाई। दोनों शहर के पीडब्ल्यूएस कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स में बी.कॉम के छात्र हैं, जिन्हें अपहरण करने व नृशंसता से स्कूली छात्र की हत्या करने के मामले में आरोपित किया गया था। उन्होंने बच्चे के शरीर पर लगभग 26 वार किए। हत्या (एक सितंबर, 2014) के एक दिन बाद बच्चे का शव सुदूरवर्ती इलाके से बरामद किया गया। तीसरा आरोपी (17) दोनों हत्यारों में से एक का भाई है, जिसे रिमांड होम भेज दिया गया। बच्चे की हत्या की साजिश में वह भी शामिल था।

पीड़ित के पिता और एक नामी चिकित्सक मुकेश चांडक ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह समाज को कड़ा संदेश देने का काम करेगा। भावुक चांडक ने संवाददाताओं से कहा, "हम फैसले का स्वागत करते हैं और इस बात से संतुष्ट हैं कि न्याय हुआ। हमारा बच्चा अब वापस लौटकर नहीं आएगा, लेकिन इससे भविष्य में ऐसे अपराध रुकेंगे। यह समाज को एक कड़ा संदेश देने का काम करेगा।" प्रधान न्यायाधीश सोनावाने ने बुधवार को दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 364 ए (फिरौती के लिए अपहरण), 120बी (आपराधिक साजिश) तथा 201 (सबूत नष्ट करने) के तहत दोषी पाया और सजा पर फैसला गुरुवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया। बचाव पक्ष के वकीलों प्रदीप अग्रवाल व मनमोहन उपाध्याय द्वारा दोषियों को आजीवन कारावास देने की याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि भले ही यह पहला अपराध था, लेकिन यह दुर्घटनावश नहीं हुई और अपराध को सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया। न्यायाधीश सोनावाने ने कहा, "उनके युवा होने से अपराध की गंभीरता कम नहीं हो जाती, इसलिए उनसे उदारता बरतने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।"

समझा जाता है कि इस अपराध को बदले की भावना के तौर पर अंजाम दिया गया, क्योंकि दावड़े चांडक के कार्यालय में एक अकाउंटैंट के तौर पर काम करता था और उसपर वित्तीय गबन का आरोप था। अपने साथी के साथ मिलकर दावड़े ने मासूम का अपहरण कर उसकी हत्या की योजना बनाई। हादसे वाले दिन युग (8) शाम लगभग पांच बजे स्कूल से लौटा और बिल्डिंग के सुरक्षा कार्यालय में अपना बैग रखकर खेलने चला गया। दावड़े व सिंह इमारत के दरवाजे के बाहर मोटरसाइकिल पर उसका इंतजार कर रहे थे। उनसे कुछ बातचीत कर युग उनके साथ चला गया। उस रात वह घर नहीं लौटा और अगले दिन सुबह में उसकी तलाश शुरू की गई। काफी तलाशी के बाद पुलिस ने नागपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर बाहरी इलाके में लोंखेरी गांव के निकट एक गटर से बच्चे का शव बरामद किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 50 गवाहों से पूछताछ की और दिलचस्प बात यह है कि कोई भी अपने बयान से नहीं मुकरा, जो बेहद कम मामलों में होता है। गवाहों से जिरह करने वाले अतिरिक्त लोक अभियोजक ज्योति वाजानी की चांडक के वकील राजेंद्र डागा व पुलिस जांच अधिकारी सत्यनारायण जयसवाल ने मदद की।

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