नई दिल्ली: राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता को लेकर अब यूके सरकार को सफाई देनी पड़ी है। यूके सरकार का कहना है कि राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता टाइपिंग की गलती हो सकती है। ब्रिटिश सरकारी विभाग कंपनी हाउस का कहना है कि राहुल गांधी को ब्रिटिश नागरिक दिखाया जाना महज टाइपिंग की गलती हो सकती है, हो सकता है कि यह जानकारी समिट करने वाले व्यक्ति की तरफ से दी गई हो।
दरअसल राहुल गांधी की नागरिकता पर गंभीर आरोप लगाते हुए भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा था कि राहुल गांधी ने खुफिया तरीके से ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर रखी है। स्वामी ने यह दावा करते हुए कहा कि इस लिहाज से राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता और लोकसभा सदस्यता छीन ली जानी चाहिए।
क्या है पूरा मामला-
स्वामी ने ब्रिटेन की कंपनी लॉ प्रशासन का एक दस्तावेज सामने किया है जिसके बाद यह बात सामने आई है। सार्वजनिक किए गए दस्तावेज के हिसाब से लंदन की एक निजी कंपनी 'बैकऑप्स लिमिटेड' को संचालित करने के लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने साल 2003-2009 के बीच कंपनी के दस्तावेजों में खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था। साल 2003 में खरीदी गई इस कंपनी में राहुल कंपनी के निदेशक थे। राहुल इस कंपनी में 65 फीसदी की हिस्सेदारी रखते हैं।
स्वामी का आरोप-
सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि राहुल ने तब खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था। स्वामी ने ट्वीट करके कहा था कि कांग्रेस का कहना है कि 2003 में राहुल गांधी ने अपनी भारतीय नागरिकता घोषित की थी। लेकन ऐसा साल 2005, 06 और 09 में क्यों नहीं किया। स्वामी ने कहा कि कंपनी के सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं।
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