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UPA ने जिस आतंकी को छोड़ा, उसी ने किया पठानकोट हमला

यूपीए सरकार ने पड़ोसियों से बेहतर रिश्ते कायम करने के लिए सद्भावना के तहत जिन लोगों को छोड़ा था उनमें से एक पठानकोट हमले का हैंडलर भी है।

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नई दिल्ली: यूपीए सरकार ने पड़ोसियों से बेहतर रिश्ते कायम करने के लिए सद्भावना के तहत जिन लोगों को छोड़ा था उनमें से एक पठानकोट हमले का हैंडलर भी है। जी हां, यूपीए सरकार पार्ट-2 के दौरान साल 2010 में मनमोहन सिंह की सरकार ने भारत-पाकिस्तान के बीच बेहतर रिश्ते कायम करने के लिए जिस जैश-ए-मोहम्मद आतंकी शाहिद लतीफ को छोड़ा था पठानकोट हमले का हैंडलर यानि प्रबंधकर्ता वहीं था।

मनमोहन सरकार की कोशिश ये थी आतंकवाद के आरोपों में जो पाकिस्तानी भारतीय जेलों में बंद हैं, उन्हें रिहा करने के बाद पाकिस्तान से संबंध सुधर सकेंगे। ये भी उम्मीद थी कि इससे आतंकवाद को खत्म कर बातचीत का माहौल बनाया जा सकेगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, पड़ोसियों के साथ बेहतर संबंध बनाने की दिशा में मनमोहन सिंह की सरकार ने 28 मई 2010 में लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद के जिन 25 आतंकियों को छोड़ा था उनमें एक आतंकी शाहिद लतीफ भी था। ये सभी आंतकी जम्मू, श्रीनगर, आगरा, वाराणसी, नैनी(यूपी) और तिहाड़ में बंद थे जिन्हें वाघा बार्डर के जरिए भेजा गया। 47 वर्षीय लतीफ करीब ग्यारह साल तक आतंक के जुर्म में भारतीय जेल में कैद थे और वो भी उन 25 रिहा होनेवाले आतंकियों में शामिल थे।

लतीफ को पहले जम्मू-श्रीगनर की जेलों में रखा गया था। लेकिन सरकार को जब इस बात की भनक लगी कि लतीफ के साथी उसे रिहा कराने के लिए कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं तो उसे वाराणसी की जेल में शिफ्ट करा दिया गया। लतीफ अमीनाबाद का रहने वाला है जो पाकिस्तान के गुजरांवाला जिले में है। उसे जैश चीफ मौलाना मसूद अजहर का सबसे करीबी माना जाता है।

पठानकोट हमले की जांच कर रही एनआईए के मुताबिक, एयरबेस पर हमला करने वाले चारों आतंकी लतीफ से ही ऑर्डर ले रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, लतीफ ने ही इन लोगों को हथियार, जूते और कपड़े मुहैया कराए थे।

सबसे दिलचस्प बात ये है कि साल 1999 के दिसंबर में आतंकियों ने आईसी-814 एयरलाइंस को हाईजैक कर 154 पैसेंजर के बदले जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर और दो लोगों को छुड़ाने में कामयाब हो गए थे। उस वक्त वाजपेयी सरकार ने जैश की तरफ से शाहिद लतीफ के साथ बाकि 31 लोगों को छोड़ने की मांगे को खारिज कर दिया था।

लतीफ भारत में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्य प्रबंधकर्ता है। साल 1999 में एनडीए सरकार ने मुश्ताक अहमद जरगार और उमर शेख (जिसनें अमेरिकी पत्रकार डेनियर पर्ल का अहरण कर उसकी हत्या की थी) को रिहा किया था।

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