नई दिल्ली: 13 जून, 1997। दिल्ली के उपहार सिनेमा हॉल में 'बॉर्डर' फिल्म का एक शो चल रहा था। सिनेमा हॉल के बेसमेंट में लगे एक जेनरेटर से अचानक आग धधक उठी। आग इतनी तेज हुई की वहां भगदड़ मच गई। इस भगदड़ के कारण 59 लोग आग में जिंदा जल गए। जानकारी के मुताबिक शो के दौरान हॉल में तय सीमा से ज्यादा लोग बैठे हुए थे। बाद में यह भी मालूम चला कि हॉल में सुरक्षा से जुड़े सभी उपकरण मौजूद नहीं थे। इस मामले की सुनवाई खत्म होने और फैसला आने में 18 साल का वक्त लग गया। फैसला यह आया कि दोनों आरोपियों को जुर्माना देकर छोड़ दिया जाएगा। दोनों पर सिर्फ 30-30 करोड़ का जुर्माना लगाकर उन्हें जेल में न रहने से मुक्ति दे दी गई।
बहस के लिए सीबीआई को नहीं मिला वक्त-
उपहार सिनेमा कांड के सिलसिले में देश की सर्वोच्च अदालत सीबीआई को अब और वक्त देने के मूड में नहीं है। आपको बता दें कि जांच एजेंसी सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में 15 मिनट का समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पहले ही काफी समय जाया हो चुका है हालांकि CBI चाहे तो फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटिशन दे सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उपहार सिनेमा कांड के दोनों आरोपी अंसल बंधुओं को राहत देते हुए उनकी सजा माफ कर दी। कोर्ट ने इन दोनों को 30 – 30 करोड़ रुपए जुर्माना देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों आरोपियों को 3 महीने के अंदर जुर्माना भरना होगा।
दिल्ली हाईकोर्ट का पूर्व फैसला-
दिल्ली हाई कोर्ट ने दोनों को एक-एक जेल की साल की सजा सुनाई थी। सुशील अंसल साढ़े चार महीने और गोपाल अंसल साढ़े 5 महीने जेल पहले ही काट चुके हैं।
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