नई दिल्ली: कभी सोचा है हालही में उठे मैगी विवाद के बाद भारत में 1300 करोड़ रुपए के नूडल्स के बाज़ार को तहस-नहस करने के पीछे कौन हो सकता है, ये पूरा मामला कहां से आया, किसने इसे शुरू किया...? आपको बता दें कि यह मामला मार्च, 2014 से चला आ रहा है। वी. के. पाण्डेय, फूड सेफटी ऑफिसर, उत्तर प्रदेश यही वो शक्स हैं जिसने 'मैगी' को मुश्किलों में डाल दिया है।
दरअसल, पाण्डेय ने पिछले साल अपने साथी अफसरों से कुछ खाने की चीज़ों के साथ पैकिट बंद खाने को नियमित जांच के लिए भेजा था, जिसमें से "मैगी" भी एक थी। साथ ही, जांच के दौरान बाराबंकी जिले से कुछ मसाले और चिप्स के नमूने भी लिए गए जिन्हें गोरखपुर की सरकारी लैब में जांच-पड़ताल के लिए भेजा गया।
वी. के. पाण्डेय ने बताया कि, वे गोरखपुर लैब में मैगी में पाए गए लेड तय सीमा से ज्यादा होने पर चौंक गए थे। उन्होंने बताया कि, "पहले मुझे लगा कि शायद रिपोर्ट बनते समय कोई गलती हुई है... पर दोबारा सुनिश्चित करने के बाद हमने पाया कि मैगी में पाए गए लेड और मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) की मात्रा तय सीमा से ज्यादा है। मैंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट की जानकारी दी।"
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