क्षमा पुत्र के समान-
चाणक्य ने क्षमा की तुलना पुत्र से की है। एक माता-पिता के लिए उसका बच्चा चाहें जितना भी बुरा काम करें, लेकिन वो उसे माफ कर देते है। माता -पिता कभी नही चाहते है कि उसके पुत्र को कोई समस्या हो। साथ ही माता-पिता का अपने पुत्र के लिए दिल बहुत बड़ा होता है। इसीलिए आचार्य ने कहा है कि क्षमा करना सबसे बड़ी चीज है। जो लोगों के पास बड़ा दिल होता है। वो सभी को माफ कर देते है। अगर आप सभी को क्षमा करते है तो इससे अच्छी बात कोई हो नही सकती।
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