दुखी व्यक्ति का भी भला न सोचें-
अगर कोई व्यक्ति हरदम दुखी रहता है और हमेशा ही ईश्वर एवं अन्य लोगों को कोसता रहता है उसे कभी भी संतुष्टि नहीं मिलती है। चाणक्य का कहना है कि हमें ऐसे व्यक्ति की मदद भी नहीं करनी चाहिए। ऐसे लोगों से संपर्क में रहने पर आप भी दुखी और दीन-हीन जैसा व्यवहार कर सकते हैं।
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