नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बलूचिस्तान का जिक्र किए जाने को लेकर चल रही बहस के बीच विदेश मंत्रालय ने आज संकेत दिया कि ये टिप्पणियां नीतिगत बदलाव का संकेत नहीं देती, जैसा कि मतलब निकाला जा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि प्रधानमंत्री का गिलगिट...बल्टिस्तान सहित बलूचिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लोगों ने यहां पिछले हफ्ते एक सर्वदलीय बैठक में अपनी समस्याओं को उठाने को लेकर उनका शुक्रिया अदा किया तथा उनके संदेशों के चलते उन्होंने (मोदी ने) लाल किले से अपने भाषण में उनके बारे में बात की।
उन्होंने कहा कि इसी वक्त मोदी ने अगले कदम के बारे में मोदी ने कुछ खास निर्देश भी दिए लेकिन उन्होंने इस बात का ब्योरा देने से इनकार किया कि ये निर्देश कैसे लागू होंगे।
उन्होंने बताया, मैं इस वक्त आपसे साझा नहीं कर सकता। हालांकि, विदेश मंत्रालय को जो करना है वह करेगा क्योंकि आखिरकार पाक के कब्जे वाले कश्मीर के लोग भी हमारे लोग हैं। मोदी के बलूचिस्तान का जिक्र करने पर उन्होंने कहा, यह नीतिगत बदलाव है या नहीं, इस बारे में मुझे यह कहना है कि भारत सरकार ने अतीत में भी बलूचिस्तान की स्थिति के बारे में बयान दिए हैं। उन्होंने बताया, मेरे पूर्वाधिकारी भी इस मुद्दे पर टिप्पणी कर चुके हैं। एकमात्र अंतर यह है कि इस बार प्रधानमंत्री को जो विभिन्न संदेश प्राप्त हुए, उसके चलते उन्होंने भारत के लोगों से उसे साझा किया।
गौरतलब है कि सोमवार को अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में मोदी ने पीओके, गिलगिट और बलूचिस्तान की स्थिति के बारे में बात की थी तथा कहा था कि वहां के लोगों ने अपना मुद्दा उठाने को लेकर उनका शुक्रिया अदा किया है। प्रवक्ता ने कहा कि भारत के सभी राजनीतिक धड़ों का प्रतिनिधित्व करने वाली सर्वदलीय बैठक में अपने मुद्दे को उठाने को लेकर इन लोगों ने प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा किया था। प्रधानमंत्री ने आभार जताने वाले इन संदेशों को इसे भारत के लोगों से स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में साझा किया। कुछ खास बलूच संगठनों के भारत से मान्यता मांगने के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, जल्दबाजी मत कीजिए।
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