ठाणे: महान समाज सुधारक लोकमान्य तिलक द्वारा प्रेरित परंपरा के अनुसार हरेक घर में अलग-अलग गणपति पूजन के बजाए यहां नवी मुंबई उपनगर के एक गांव में एकता का एक उदाहरण पेश करते हुए पिछले 50 साल से अधिक समय से एक गांव एक गणपति की तर्ज पर उत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
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अगरोली गांव के निवासियों के एक समूह ने 1961 में इस अवधारणा की शुरूआत की और अभी भी यह उसी तरीके से मनाया जाता है और ग्रामीण अकेले यह उत्सव मनाने के पक्ष में नहीं है जो अब एक आम बात हो गयी है।
अगरोली गांव के निवासियों को इस तरह का उदाहरण स्थापित करने पर गर्व है। इन दस दिनों के दौरान इस तरह का उत्सव संयुक्त रूप से मनाने से ना केवल ग्रामीण एक साथ आते हैं बल्कि उनके बीच एक मजबूत रिश्ता बनाने में भी मदद मिलती है।
स्थानीय पार्षद सरोज पाटिल ने बताया, उत्सव मनाने के लिए साथ आने वाले ग्रामीणों के बीच मुझे कमाल का उत्साह देखने को मिलता है और यह मुझे अच्छी तरह नागरिक सेवा प्रदान करने में सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि जब 60 के दशक में उत्सव की शुरूआत हुयी तब गांव में करीब 20 परिवार ही था। आज यहां करीब 150 परिवार है।
उन्होंने बताया कि उस समय प्रत्येक परिवार 15 रूपये का योगदान देता था लेकिन अब कीमत बढ़ने और खर्चों के कारण प्रत्येक परिवार को 1,000 रूपया देना पड़ता है जो ग्रामीण खुशी-खुशी प्रदान करते हैं।
शिवसेना के नेता ने बताया कि सामूहिक उत्सव के कई लाभ हैं जैसे अलग-अलग घरों पर भारी खर्च नहीं पड़ता है और समारोह आयोजित करने में कम समय लगता है। दस दिनों में सभी प्रबंधों पर निगरानी और भव्य समारोह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी करीब 10-15 परिवारों पर है। उन्होंने बताया कि इन दस दिनों के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमें ग्रामीण बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।
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