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मप्र: जब IS अफसर का फेसबुक पोस्‍ट बना विवाद का विषय

मध्यप्रदेश में नौकरशाही किस तरह बे-लगाम हो चुकी है, इसका उदाहरण बड़वानी कलेक्टर द्वारा नेहरु गांधी परिवार के समर्थन में मंगलवार को फेसबुक में की गई पोस्ट से उजागर हो गया है।

अजय गंगवार- India TV Hindi
अजय गंगवार

इन्दौरः मध्यप्रदेश में नौकरशाही किस तरह बे-लगाम हो चुकी है, इसका उदाहरण बड़वानी कलेक्टर द्वारा नेहरु गांधी परिवार के समर्थन में मंगलवार को फेसबुक में की गई पोस्ट से उजागर हो गया है। इस पोस्ट में सिविल सर्विसेस कोड ऑफ कंडक्ट की धज्जियाँ उडाते हुए खुले रुप से नेहरु गांधी परिवार का बचाव करते हुए कलेक्टर ने उनपर हमला करने वालों पर व्यंग किया है।

यह व्यंग्य अपरोक्ष रुप से भाजपा के उपर है। वही प्रदेश की सरकार चुप्पी साधे हुए बैठी है। हॉलकि अपनी निजी राय बताते हुए कलेक्टर ने पोस्ट को हटा दिया। उधर नरसिंहपुर के कलेक्‍टर ने जयललिता को बधाई दी हालांकि यह प्रदेश में यह पहला मामला नहीं है। हाल ही में नरसिंगपुर के कलेक्टर ने तमिलनाडु में जे जयललिता की जीत पर फेसबुक पर बधाई दी थी।

बडवानी कलेक्टर अजय गंगवार दो कदम और आगे निकले
अभी यह मामला पूरी तरह से ठंडा हुआ भी नहीं था कि मंगलवार को बडवानी कलेक्टर अजय गंगवार ने फेसबुक में एक पोस्ट से फिर महौल गर्म हो गया। कलेक्टर गंगवार ने पोस्ट में लिखा है कि जर गलतियां तो बता दीजिये जो नेहरु को नहीं करनी चाहिए थी,तो अच्छा होता। यदि उन्होनें 1947 में हिन्दू तालिबानी राष्ट्र बनने से रोका तो यह उनकी गलती थी।

उन्होनें आईआईटी, इसरो, बीएआरएसी, आईआईएसबी, आईआईएम, भेल, स्टील प्लांट,डेम्स, थर्मल पॉवर लाए यह उनकी गलती थी। आसाराम और रामदेव जैसे इंटेलेक्चुअल की जगह साराभाई और होमी जहांगीर को सम्मान दिया, यह उनकी गलती थी। उन्होनें देश में गौशाला और मन्दिर की जगह एक यूनिवर्सिटी खोली, यह भी उनकी घोर गलती थी। उन्होनें आप को अन्धविश्वासी की जगह एक साइंटिफिक रास्ता दिखाया, यह भी उनकी गलती थी। इन सब गलतियों के लिए गांधी फैमली को देश से माफी तो बनती है।

इस पोस्ट में जिस तरह से नेहरु गांधी पर हमला करने वालों को तंज कस गया है वह सीधे सीधे संघ भाजपा और उनके सहयोगी संगठनों को निशाने पर रखकर किया गया है। हॉल ही में बाबा रामदेव को प्रदेश सरकार ने पीथमपुर के पास उधोग स्थापित करने के लिए जगह दी है।

बडवानी कलेक्टर के इस आचारण को प्रदेश के कई पूर्व नौकरशाह सिविल सर्विसेस कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन मानते है। लेकिन प्रदेश की सरकार इस मामले में चुप है। दूसरी ओर कलेक्टर का कहना है कि यह उनकी अपनी निजी राय है। जबकि जिस मंच का उपयोग किया गया है वह सार्वजनिक है।

मामला बढ़ने पर निजी राय बताते हुए कलेक्‍टर ने पोस्‍ट हटाई
हॉलकि इस मामले को तुल पकडता देख कलेक्टर ने पोस्ट फेसबुक से हटा ली है। किंतु आग में घी ने अपना काम तो कर ही दिया।

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