1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. भारतीय सिनेमा को विश्व फलक तक ले गए सत्यजीत रे का आज जन्मदिन है

भारतीय सिनेमा को विश्व फलक तक ले गए सत्यजीत रे का आज जन्मदिन है

उनका जन्म 2 मई 1921 को कलकत्ता (कोलकाता) के बंगाली राय परिवार में हुआ था। अंग्रेज जिस तरह ठाकुर का उच्चारण 'टैगोर' करते थे, उसी तरह राय को 'रे' कहते थे।

Satyajit Ray- India TV Hindi
Satyajit Ray

नई दिल्ली, सत्यजीत रे भारतीय सिनेमा के एकमात्र ऐसे पुरोधा हैं, जिनका दामन मद्मश्री से पद्म विभूषण तक और ऑस्कर अवार्ड से लेकर दादासाहेब फाल्के पुरस्कार व 32 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से भरा है। भारतीय सिनेमा की 20वीं शताब्दी पर गौर करें तो कोई भी बात सत्यजीत दा का जिक्र किए बिना अधूरी रहेगी।

वह जाने-माने फिल्म निर्माता ही नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की पहचान बन चुके हैं। उन्हें बेहतरीन फिल्मों के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपनी फिल्मभाषा गढ़ी। उनकी कृतियों को किसी भाषा के दायरे में बांधा नहीं जा सकता। अपनी बहुमुखी प्रतिभा की बदौलत सत्यजीत भारतीय सिनेमा को विश्व फलक तक ले गए।

सत्यजीत रे ने फिल्मों के साथ-साथ अपने लेखन और चित्रकृतियों से भारतीय संस्कृति पर अमिट छाप छोड़ी। वह संगीतकार और चित्रकार होने के अलावा, बांग्ला के बेहद लोकप्रिय लेखक भी थे। उनका समूचा परिवार ही सदा कला और साहित्य से जुड़ा रहा।

उनका जन्म 2 मई 1921 को कलकत्ता (कोलकाता) के बंगाली राय परिवार में हुआ था। अंग्रेज जिस तरह ठाकुर का उच्चारण 'टैगोर' करते थे, उसी तरह राय को 'रे' कहते थे। इसलिए वह सत्यजीत रे कहलाए।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक कमर्शियल आर्टिस्ट के रूप में की थी। अपने माता-पिता की इकलौती संतान सत्यजीत के पिता सुकुमार राय का निधन सन् 1923 में हो गया था। उस समय सत्यजीत महज दो साल के नन्हा बालक थे। उनका पालन-पोषण उनकी मां सुप्रभा राय ने अपने भाई के घर में रहकर किया।

अगली स्लाइड में पढ़ें बच्चों के लिए रोचक कविताएं लिखते थे सत्यजीत रे

Latest India News