धार: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला में शुक्रवार को बसंत पंचमी पर भोज उत्सव समिति ने पूजन और हवन नहीं किया, जबकि प्रशासन ने चुनिंदा मुसलमानों को गुपचुप तरीके से भोजशाला की छत पर ले जाकर नमाज अदा कराई।
जिला जनसंपर्क अधिकारी श्रवण सिंह ने कहा कि भोज उत्सव समिति ने सुबह हवन-पूजन भोजशाला के बाहर किया, जबकि प्रशासन ने दोपहर में मुस्लिम समाज के लगभग 25 प्रतिनिधियों को भोजशाला के पिछले दरवाजे से ले जाकर छत पर लगे पंडाल में नमाज अदा कराई।
भोजशाला के बाहर पहली बार हुआ हवन-पूजन
इससे पहले प्रशासन और सरकार की कोशिशों के बीच हिंदू समाज के कुछ लोग हवन-पूजन की सामग्री लेकर सुबह भोजशाला के भीतर पहुंचे तो लगा कि यह मामला शांति से निपट जाएगा। लेकिन भोजशाला के भीतर पूजन- हवन शुरू होता, इससे पहले ही भोज उत्सव समिति के सदस्य बाहर आ गए।
समिति के अशोक जैन ने बाहर आकर कहा कि "भोजशाला के भीतर ऐसे लोग जमा हैं, जिनका इस आयोजन से कोई लेना-देना नहीं है, लिहाजा अब वे बाहर ही पूजा करेंगे।" उसके बाद हिदू समाज के लोगों ने बाहर हवन-पूजन किया।
भोजशाला परिसर छावनी में तब्दील
भोज उत्सव समिति ने आरोप लगाया कि "भोजशाला परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। कई लोगों को हिंदुओं के भेष में खड़ा कर दिया गया है। हिंदू समाज के लोग भोजशाला में पूजा करने जाते हैं न कि युद्ध करने।" लिहाजा उन्होंने भोजशाला के बाहर ही हवन-पूजन किया।
बड़ी संख्या में लोग भोजशाला पहुंचे हैं, मगर अधिकांश लोगों ने भोजशाला के भीतर जाने के बजाय बाहर बने हवन कुंड में आहूति दी है। संभवत: यह पहला मौका है जब भोजशाला के बाहर पूजन-हवन हुआ है।
आखिर भोजशाला पर विवाद क्यों है ?
- परमार वंश के राजा भोज ने पाठशाला और सरस्वती मंदिर बनवाया
- 1456 में महमूद खिलजी ने मकबरा और दरगाह बनवाया
- 1995 में मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज की अनुमति मिली
- 1997 में कलेक्टर ने आम लोगों के जाने पर रोक लगाई
- सिर्फ बसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूजा की छूट
- शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज पढ़ने की अनुमति
- शुक्रवार के दिन ही बसंत पंचमी पड़ने पर विवाद शुरू
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