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कुख्यात उग्रवादी समेत 9 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, डेडलाइन से एक दिन पहले आंध्र प्रदेश में नक्सलवाद का अंत

केंद्र ने वादा किया था कि 31 मार्च 2026 से पहले देश को नक्सलवाद से मुक्त कर दिया जाएगा। डेडलाइन से एक दिन पहले कुख्यात नक्सली नेता सी नारायण राव समेत 9 उग्रवादियों ने सरेंडर कर दिया है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : PTI सांकेतिक तस्वीर

आंध्र प्रदेश में कुख्यात नक्सली नेता सी नारायण राव समेत 9 उग्रवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस महानिदेशक हरीश कुमार गुप्ता ने दावा किया कि 'राज्य में वामपंथी उग्रवाद समाप्त हो गया है।' गुप्ता के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाला राव 'आंध्र ओडिशा बॉर्डर' (AOB) का सचिव था और 36 सालों से माओवादी आंदोलन में सक्रिय था। 

कई अपराधों में शामिल रहा राव

वह साल 2018 में विधायक किदारी सर्वेश्वर राव की हत्या, 2001 में सीआई गांधी और 1997 में मुख्य आरक्षक नरेन्द्र दास की हत्या जैसे कई संगीन अपराधों में शामिल था। राव 1990 में माओवादी आंदोलन में शामिल हुआ था। 

आंध्र प्रदेश में वामपंथी उग्रवाद का अंत

गुप्ता ने कहा, 'केंद्र ने वादा किया था कि 31 मार्च, 2026 से पहले वामपंथी उग्रवाद खत्म कर दिया जाएगा, जिसमें पिछले दो सालों में हमने अपनी भूमिका निभाई। आज, आंध्र प्रदेश में वामपंथी उग्रवाद का अंत हो गया है।' 

माओवादी भूमिगत अभियान में एक भी कैडर सक्रिय नहीं

हरीश कुमार गुप्ता ने दावा किया कि आंध्र प्रदेश में माओवादी भूमिगत अभियान में अब एक भी सक्रिय कैडर नहीं है। उन्होंने राज्यभर में चलाए गए उग्रवाद विरोधी अभियानों में समन्वित प्रयासों के लिए 'ग्रेहाउंड्स', विशेष खुफिया शाखा और जिला पुलिस इकाइयों की भूमिका की भी सराहना की। 

81 गिरफ्तारियां और 106 आत्मसमर्पण

इसी के साथ उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों को भी माओवाद विरोधी अभियानों के दौरान मदद की। पुलिस ने अभियान का व्यापक विवरण देते हुए बताया कि इस दौरान कुल 18 मुठभेड़ें हुईं, 81 गिरफ्तारियां की गईं और 106 आत्मसमर्पण हुए, जिससे कुल कार्रवाई की संख्या 205 तक पहुंच गई। 

माओवादी विचारधारा से लोगों का मोहभंग

पुलिस ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले कई कैडर 2017 से 2023 के बीच इस अभियान में शामिल हुए थे और सुरक्षा शिविरों पर हमलों व अन्य हिंसक घटनाओं में लिप्त थे। गुप्ता ने कहा कि जनाधार में कमी, माओवादी विचारधारा से मोहभंग और राज्य सरकार की आकर्षक पुनर्वास नीतियों के चलते ही इन माओवादियों ने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना है।

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