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जब भारत के एक कदम से पूरी दुनिया में मच गई थी खलबली, नाम था 'ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा'

आज से 51 साल पहले भारत ने एक ऐसा ऑपरेशन लॉन्च किया था, जिसे देखकर पुरी दुनिया में खलबली मच गई थी। इसका नाम ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा था। इस ऑपरेशन के बाद से भारत पर अमेरिका ने प्रतिबंध भी लगा दिए थे। आइये जानते है कि ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा क्या है और इसके नाम के पीछे की क्या कहानी है।

भारत ने पोखरण में किया था पहला परमाणु परीक्षण।- India TV Hindi
Image Source : FILE भारत ने पोखरण में किया था पहला परमाणु परीक्षण।

Operation Smiling Buddha: दुनिया भर में आज तमाम देशों के बाद परमाणु शक्ति है, जबकि कई देश आज भी इसके लिए परीक्षण कर रहे हैं। वहीं भारत ने यह मकाम आज से 51 साल पहले ही हासिल कर लिया था। भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण 18 मई 1974 को किया था। यह परमाणु परीक्षण राजस्थान के पोखरण में किया था। इस परमाणु परीक्षण को ही ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा नाम दिया गया था। हालांकि इसके नाम के पीछे एक रोचक तथ्य भी छिपा हुआ है। कई लोगों के मन में यह भी सवाल था कि बुद्ध को शांति के लिए जाना जाता है, ऐसे में परमाणु परीक्षण वाले इस ऑपरेशन का नाम बुद्ध के नाम पर क्यों रखा गया है। 

दुनिया का छठवां देश बना था भारत

दरअसल, उस समय जब भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया तब ऐसा करने वाले देशों की संख्या सिर्फ पांच थी। भारत से पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच स्थायी सदस्यों ने ही यह काम किया था। इसमें चीन, रूस, फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन ही ऐसे देश थे, जिन्होंने परमाणु परीक्षण किया था। इन पांच देशों के बाद भारत ऐसा करने वाला छठवां देश बना, जिसने यह उपलब्धि हासिल की। वहीं इस पूरे ऑपरेशन को ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा नाम दिया गया। बताया जा रहा है कि उस दिन बुद्ध पुर्णिमा थी, जिस वजह से इसे ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा नाम दिया गया। वैज्ञानिकों ने इसे ‘ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा’, भारतीय सेना ने ‘हैप्पी कृष्णा’ और ऑफिशियल डॉक्युमेंट में इसे ‘पोखरण-1’ नाम दिया गया।

खुफिया तरीके से की गई टेस्टिंग

भारत के इस परमाणु परीक्षण को वैज्ञानिकों ने काफी खुफिया तरीके से अंजाम दिया। इस ऑपरेशन के बारे में प्रधानमंत्री के बाद वैज्ञानिकों को ही जानकारी थी। रिपोर्ट्स की मानें तो खुद रक्षा मंत्री को भी इस ऑपरेशन के बारे में परीक्षण के बाद जानकारी मिली। डॉ. राजा रमन्ना इस परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान के मुखिया थे। वहीं इस परमाणु हथि‍यार को डॉ. पी के अयंगर ने डिजाइन और तैयार किया था। इसके अलावा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के प्रोफेसर होमी जे. भाभा को इस कार्यक्रम के नेतृत्व के लिए चुना गया। इस परीक्षण के बाद से ही उन्हें “भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक” के रूप में जाना जाने लगा।

भारत को झेलने पड़े प्रतिबंध

हालांकि अपना पहला परमाणु परीक्षण करने को लेकर भारत को वैश्विक स्तर पर काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। इस परीक्षण के बाद से खासकर अमेरिका पूरी तरह से तिलमिला उठा और उसने भारत पर कई सारे प्रतिबंध लगा दिए। हालांकि भारत ने पूरी दुनिया को यह भी संदेश दिया ये ऑपरेशन सिर्फ शांति स्थापित करने के लिए किया गया है। भारत किसी भी देश पर परमाणु हमला नहीं करेगा। इस परीक्षण को सुबह 8 बजकर 5 मिनट पर सफल किया गया।

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