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‘रील्स में मत खो जाना…’ जेन जी को धीरेंद्र शास्त्री की 5 बड़ी नसीहतें, माइंडसेट से लेकर प्यार तक पर खुलकर बोले

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जेन जी युवाओं को सोशल मीडिया और रील्स में समय बर्बाद करने से बचने, परिवार व संस्कारों से जुड़े रहने और लक्ष्य पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने वायरल खबरों पर तुरंत भरोसा न करने, गाली के बजाय संवाद चुनने और प्रेम व करियर में समझदारी से फैसले लेने की बात कही।

Highlights

  • धीरेंद्र शास्त्री बोले- जेन जी तेज है, लेकिन उसे सही दिशा और खुद से कनेक्शन चाहिए।
  • सोशल मीडिया एडिक्शन से बचने के लिए तीन दिन के मेडिटेशन कार्यक्रम की बात कही।
  • आरक्षण पर बोले- जरूरतमंदों को लाभ मिले, जातियों की जगह अमीर-गरीब का आधार हो।

नई दिल्ली: देश में जेन जी यानी नई युवा पीढ़ी को लेकर चल रही बहस के बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने युवाओं से जुड़ी कई अहम बातों पर अपनी राय रखी। इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर और एंकर सौरव शर्मा को दिए खास इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि आज की जेन जी बहुत तेज और समझदार पीढ़ी है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वह अपना हक लेना और अपनी बात रखना जानती है, लेकिन उसे सही दिशा और खुद से जुड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह दुनिया से तो जुड़ गई है, लेकिन खुद और अपने परिवार से दूर होती जा रही है।

धीरेंद्र शास्त्री ने युवाओं को दी खास सलाह

धीरेंद्र शास्त्री ने युवाओं को सलाह दी कि विचार नए रखें, लेकिन संस्कार पुराने और मजबूत रखें। उन्होंने इसके लिए ‘माइंडसेट लाइफ सेट’ कार्यक्रम की जानकारी भी दी। उनके मुताबिक 3 दिन के इस ऑफलाइन कार्यक्रम में सुबह ध्यान और मेडिटेशन के जरिए युवाओं को अपने अवचेतन मन को समझने और सोशल मीडिया से दूरी बनाने की कोशिश कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया और रील्स का असर इतना बढ़ गया है कि युवा घंटों स्क्रॉल करते रहते हैं और उन्हें समय बीतने का पता तक नहीं चलता। उनके मुताबिक सोशल मीडिया पर अच्छी जानकारी भी है और लोगों के ‘मानसिक कचरे’ का बड़ा हिस्सा भी मौजूद है, इसलिए युवाओं को अपने भावनाओं पर नियंत्रण सीखना चाहिए। उन्होंने युवाओं को 5 बड़ी नसीहतें दीं:

  1. रील्स के चक्कर से बचें: सोशल मीडिया पर घंटों समय बिताने के बजाय अपनी भावनाओं और मोबाइल इस्तेमाल पर कंट्रोल रखें।
  2. दुनिया से जुड़ें, खुद से नहीं कटें: परिवार, संस्कार और भारतीय संस्कृति से जुड़े रहना भी उतना ही जरूरी है।
  3. सही दिशा में लगाएं अपनी ऊर्जा: सिर्फ जानकारी जुटाने के बजाय अपने लक्ष्य तय करें और उसी से जुड़ी जानकारी हासिल करें।
  4. हर बात पर तुरंत भरोसा न करें: सोशल मीडिया की अधूरी क्लिप या वायरल खबर देखकर फैसला न लें, पहले पूरी सच्चाई और तथ्य जानें।
  5. गाली नहीं, संवाद चुनें: अपनी बात और विरोध खुलकर रखें, लेकिन गाली-गलौज से बचें। हर समस्या का समाधान आंदोलन नहीं, बातचीत से भी हो सकता है।

राहुल के मनुस्मृति वाले बयान पर कही ये बात

मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी की ओर से उठाए गए सवालों पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वह नेताओं को जवाब नहीं देते, लेकिन इस मुद्दे पर अपनी बात जरूर रख सकते हैं। उन्होंने मनुस्मृति को महिला विरोधी बताए जाने की बात को खारिज करते हुए कहा कि जिस परंपरा में ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता’ जैसी मान्यता हो, वहां महिलाओं के सम्मान की बात सबसे पहले आती है। उन्होंने सीता-राम, राधा-कृष्ण और पार्वती-शिव जैसे उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में कई जगह महिलाओं का नाम पहले लिया जाता है। धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि किसी ग्रंथ की एक पंक्ति या एक संदर्भ को पकड़कर पूरे ग्रंथ को गलत ठहराना उचित नहीं है। उनके मुताबिक पुराने ग्रंथों और परंपराओं को संदर्भ के साथ समझने और जरूरत पड़ने पर उनमें सुधार या पुनर्विचार करने की जिम्मेदारी संतों की भी है।

आंदोलन, गाली और राजनीति पर क्या कहा?

जेन जी से जुड़े विरोध प्रदर्शनों पर उन्होंने कहा कि युवाओं की बात सुनी जानी चाहिए, लेकिन हर समस्या का समाधान आंदोलन नहीं है। उन्होंने संवाद को आंदोलन से बेहतर रास्ता बताया। उनका कहना था कि छात्रों को राजनीतिक दलों का मोहरा नहीं बनना चाहिए। प्रदर्शन में गाली-गलौज को उन्होंने संस्कारों की कमी से जोड़ा, लेकिन कहा कि अपनी बात रखना और विरोध करना गलत नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें मोदी का व्यक्तित्व असाधारण लगता है और उन्हें लगता है कि प्रधानमंत्री दल से ज्यादा देश के बारे में सोचते हैं। वहीं किसी सियासी पार्टी के पक्ष में खुलकर जाने से उन्होंने इनकार किया और कहा कि सत्ता में वही आए जो देश, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य के बारे में सोचे।

आरक्षण, जातिवाद पर क्या बोले धीरेंद्र शास्त्री?

आरक्षण के सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वह आरक्षण के विरोध में नहीं हैं और जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ मिलना चाहिए। हालांकि उन्होंने सुझाव दिया कि समाज को अमीर और गरीब के आधार पर देखने की दिशा में भी विचार होना चाहिए। जातिगत भेदभाव खत्म करने की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि जातिगत अभिमान देश को कमजोर करता है। उनके मुताबिक जातियां खत्म करना जरूरी नहीं, लेकिन ऊंच-नीच का अहंकार जरूर खत्म होना चाहिए। उन्होंने युवाओं को विवेकानंद, अल्बर्ट आइंस्टीन, एपीजे अब्दुल कलाम और रानी लक्ष्मीबाई जैसे व्यक्तित्वों को रोल मॉडल बनाने की सलाह दी। जेन जी के लिए बनाए गए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ जैसे नामों पर उन्होंने कहा कि लोग अपनी पसंद का नाम रख सकते हैं, लेकिन युवाओं को किसी भी विचार को तर्क के आधार पर स्वीकार करना चाहिए।

जापान यात्रा और भूकंप का अनुभव बताया

जापान यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वहां पहली बार भारतीय धर्मगुरु के रूप में उनकी कथा हुई, जिसमें भारतीय मूल के हजारों लोगों के साथ जापानी लोग भी शामिल हुए। उन्होंने जापान में आए 5.9 तीव्रता के भूकंप का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वह ऊंची इमारत में थे और करीब 18 सेकंड तक धरती को हिलते महसूस किया। इसके अलावा उन्होंने जापान की बुलेट ट्रेन, इंफ्रास्ट्रक्चर और वहां की व्यवस्थाओं की तारीफ की। बता दें कि बाबा बागेश्वर कुछ दिन पहले श्रीलंका भी पहुंचे थे और विश्व बंधुत्व की कामना के साथ योग का संदेश दिया था।

प्रेम और करियर से जुड़े सवालों पर भी बोले

युवाओं के प्रेम और करियर से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा कि आज के समय में लक्ष्य पर ध्यान देना जरूरी है। उनका कहना था कि धोखा मिलने पर भी खुद धोखा नहीं देना चाहिए और किसी पर भरोसा करने से पहले यह देखना चाहिए कि क्या वह जीवनभर साथ निभा सकता है। उन्होंने 4 बच्चों की अपनी अपील को भी जनसंख्या घटने और भविष्य में बुजुर्ग आबादी बढ़ने की चिंता से जोड़ा। साथ ही समान जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी की समस्या अपनी जगह है, लेकिन बच्चों की संख्या लगातार घटने से भविष्य में देश के सामने दूसरी चुनौती खड़ी हो सकती है। धीरेंद्र शास्त्री ने अंत में कहा कि आज की पीढ़ी को सिर्फ जानकारी नहीं, बल्कि सही लक्ष्य और उसे लागू करने की क्षमता चाहिए।

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