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चंबा में आधी रात घर के ऊपर गिरा 10 टन वजनी पत्थर, तहस-नहस हुआ लेंटर, बड़ा हादसा टला

पीड़ित परिवार ने बताया कि 100 क्विंटल से भी ज्यादा भारी पत्थर उनके घर में गिरा। इससे उनके घर का लेंटर पूरी तरह बर्बाद हो गया। हालांकि, प्रशासन ने 25 हजार रुपयों की शुरुआती मदद की है और आने वाले दिनों में 7 लाख तक का मुआवजा मिलेगा।

Chamba boulder fell on house- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT चट्टान गिरने से घर टूटा

हिमाचल प्रदेश के चंबा में लोग भारी बारिश की तबाही से अभी उभर नहीं पाए थे कि अब लैंडस्लाइडिंग का कहर शुरू हो गया है। मंगलवार देर रात करीब 12 से साढ़े 12 बजे के बीच चंबा के गांव सरोल की अपर घोलटी में बहुत बड़ा लैंड स्लाइड हुआ, जिसमें करीब सौ क्विंटल से भी ज्यादा वजनी विशाल पत्थर परविंदर कुमार के घर के ऊपर आ गिरा। इस कारण पक्के मकान का लेंटर चकनाचूर हो गया। 

पत्थर इतना बड़ा था कि उसकी चपेट में आने वाले बड़े पेड़, खेत खलियान सबको तहस-नहस करता हुआ और छत को तोड़ता आगे निकल गया। गनीमत रही कि घर के भीतर दो अगले कमरे में यह भीमकाय पत्थर नहीं गिरा, अन्यथा कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था। पत्थर गिरने के कारण घर के भीतर रखी अन्य सामग्री सब तहस-नहस हो गई।

पीड़ित परिवार को ₹25 हजार की मदद

जिला परिषद उपाध्यक्ष लियाकत अली को जैसे ही इस घटना के बारे में पता चला, वह मौके पर पहुंचे। उन्होंने हल्का पटवारी से सभी दस्तावेज बनवाते हुए चंबा सदर के विधायक नीरज नय्यर को कहकर पीड़ित परिवार को तुरंत 25 हजार रुपयों की राहत राशि प्रदान करवाई। उन्होंने कहा कि हालांकि प्रदेश सरकार इस तरह के मामले में 7 लाख तक का मुवावजा देती है और उसके लिए सारे दस्तावेज बनवाने को हल्का पटवारी को कह दिया गया है। उन्होंने कहा कि तत्काल राहत राशी देने के साथ डीसी चंबा से राहत कीट जिस्में राशन पानी के अलावा कपड़े, सब कुछ होता है, जल्द ही पीड़ित परिवार को प्रदान कर दी जाएगी।

लैंडस्लाइड से 25 से ज्यादा घरों को नुकसान

भारी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई। इससे 25 से ज़्यादा घरों और एक दुकान को नुकसान पहुंचा तथा एक दर्जन से ज़्यादा गाड़ियां मलबे में दब गईं। हालांकि, अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। मंगलवार सुबह से हो रही लगातार बारिश के कारण जिले में नाले और नदियां उफान पर हैं, जिससे आस-पास के घरों में भारी मात्रा में मलबा भर गया है। सुल्तानपुर नाला विकराल रूप ले चुका है, जिससे चंबा के सुल्तानपुर मोहल्ले में 25 से ज्यादा रिहायशी मकानों और एक दुकान को नुकसान पहुंचा है। खबर है कि चंबा में उदयपुर-गोल्थी-नवोदय रोड पर भरियाड के पास भूस्खलन के बाद कार, ट्रक और दोपहिया वाहनों समेत कम से कम एक दर्जन वाहन मलबे के नीचे दब गए।

रिहायशी इलाकों में मलबा जमा

भूस्खलन के कारण सड़कों और रिहायशी इलाकों में भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया है। तडोली नाले के तेज बहाव के साथ आए बड़े पत्थर एक दुकान में घुस गए और उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया। राज्य आपात अभियान केंद्र के अनुसार, भारी बारिश की वजह से हुए भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के कारण कुल 178 सड़कें बंद हैं। सबसे ज्यादा सड़कें 58 मंडी जिले में बंद हुईं। कुल्लू में 42, चंबा में 30, सिरमौर में 26, शिमला में 16, लाहौल-स्पीति में तीन, कांगड़ा में दो और ऊना जिले में एक सड़क बंद है। कम से कम 107 जलापूर्ति परियोजनाओं और 62 बिजली ट्रांसफॉर्मरों को नुकसान पहुंचा है। शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड के एक बयान के अनुसार, सतलुज जल आपूर्ति परियोजना में ट्रांसफॉर्मर खराब होने और अन्य जल स्रोतों में भारी गाद जमा होने एवं बाढ़ के कारण, अगले कुछ दिनों तक शिमला में जलापूर्ति बाधित हो सकती है। राज्य में 30 जून को मॉनसून की शुरुआत के बाद से अब तक भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ की वजह से 15 लोगों की मौत हो चुकी है।

(चंबा से सुभाष महाजन की रिपोर्ट)

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