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आप की अदालत: अब केजरीवाल के 'शीश महल' का क्या होगा? रेखा गुप्ता ने दिया ये जवाब

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पहली बार बताया कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल द्वारा बनाए गए करोड़ों रुपये के 'शीश महल' में शिफ्ट न होने का फैसला क्यों किया और राज निवास मार्ग पर एक पुनर्निर्मित बंगले में जाने का विकल्प क्यों चुना।

आप की अदालत में दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता - India TV Hindi
Image Source : INDIA TV आप की अदालत में दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता

नई दिल्लीः दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता लोकप्रिय और चर्चित शो 'आप की अदालत' में इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर इन चीफ रजत शर्मा के सवालों का खुलकर जवाब दिया। 'आप की अदालत' में रेखा गुप्ता ने आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा। 

'शीश महल' का क्या होगा?

यह पूछे जाने पर कि अब शीश महल का क्या होगा? रेखा गुप्ता ने जवाब दिया: "हमारी यही योजना है कि जनता का पैसा जो वहां पर बर्बाद किया गया। कोशिश हमारी रहेगी कि उसके लिए हम ऐसा निर्णय लें कि जो पैसा वहां लगा है वह फिर से खजाने में आए और उससे जनता को लाभ हो, काम हो।

मेरे घर के दरवाज़े दिल्लीवालों के लिए हमेशा खुले हैं

रेखा गुप्ता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने 80 करोड़ का शीशमहल बनवाया, केजरीवाल के शीशमहल में किसी की एंट्री नहीं थी, मेरे घर के दरवाज़े दिल्लीवालों के लिए हमेशा खुले हैं'।

केजरीवाल के बनवाए 'शीश महल' में क्यों नहीं रहेंगी, बताई वजह

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पहली बार बताया कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल द्वारा बनाए गए करोड़ों रुपये के 'शीश महल' में शिफ्ट न होने का फैसला क्यों किया और राज निवास मार्ग पर एक पुनर्निर्मित बंगले में जाने का विकल्प क्यों चुना। रजत शर्मा के प्रतिष्ठित शो 'आप की अदालत' में उपस्थित मुख्यमंत्री से पूछा गया कि 'शीश महल' में शिफ्ट होने में क्या नुकसान है। रेखा गुप्ता ने जवाब दिया, "नींद नहीं आती। मुझे दिखाई देता है कि कैसे लोग त्रस्त हैं और केजरीवाल साहब यहीं पर रह कर के मस्त थे। वह पर्दे भी नहीं खोलते थे। जनता की आवाज उनके कानों में नहीं आती थी। वह अपने घर की चारदीवारी के भीतर ही रहते थे।

चार महीने से मेरे पास सरकारी आवास नहींः रेखा

रेखा गुप्ता ने कहा कि आज चार महीने सीएम रहने के बाद मेरे पास सरकारी आवास नहीं है। मैं जनता की शिकायतें सुनने के लिए अपनी गली में एक मेज और कुर्सी का इस्तेमाल करता हूं। इतिहास में कभी भी किसी सीएम को ऐसा आवास नहीं दिया गया, जहां एलजी का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बैठता हो। चूंकि दिल्ली में कोई आधिकारिक सीएम आवास नहीं था, इसलिए मेरे लिए वहां जाना और रहना आसान था।  

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