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'वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा का महत्व बढ़ता जा रहा', बुक लॉन्च के कार्यक्रम में बोले बृजेश सिंह

मुंबई में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. दुर्गा प्रसाद दुबे की पुस्तक ‘Demystifying Cyber Security’ का लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने साइबर जागरूकता, डेटा सुरक्षा और AI युग में साइबर सुरक्षा की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया गया।

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Image Source : REPORTER INPUT साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. दुर्गा प्रसाद दुबे की पुस्तक ‘Demystifying Cyber Security’ के लोकार्पण का दृश्य।

मुंबई: डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा केवल तकनीक का विषय नहीं, बल्कि समाज की सोच और व्यवहार का हिस्सा बननी चाहिए। यह बात महाराष्ट्र सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय के प्रधान सचिव और महानिदेशक बृजेश सिंह ने कही। वे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के सभागार में आयोजित पुस्तक ‘डिमिस्टिफाइंग साइबर सिक्योरिटी’ के लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। यह पुस्तक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. दुर्गा प्रसाद दुबे द्वारा लिखी गई है। कार्यक्रम में उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधि, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, शोधकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

साइबर सुरक्षा आज की सबसे बड़ी जरूरत

बृजेश सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। आम लोगों के जीवन में डेटा सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा बेहद आवश्यक हो गई है। इसलिए समाज में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक सोच विकसित करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा केवल नियमों का पालन करने या तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा का वास्तविक आधार हमारी सोच और मानसिकता में होता है।

'लेखन भी है समाज के लिए बड़ा योगदान'

अपने संबोधन में बृजेश सिंह ने कहा कि कई लोग अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करते हैं, लेकिन वे अपने अनुभवों को लिख या व्यक्त नहीं कर पाते। ऐसे में जब डॉ. दुर्गा प्रसाद दुबे जैसे विशेषज्ञ अपने ज्ञान को पुस्तक के रूप में लोगों तक पहुंचाते हैं, तो यह पाठकों के लिए एक बड़ी सौगात होती है। उन्होंने लोगों को लेखन के लिए भी प्रेरित करते हुए कहा कि हर व्यक्ति के मन में कभी न कभी कुछ लिखने की इच्छा होती है। आज के दौर में ब्लॉग लिखने की शुरुआत करनी चाहिए। चाहे शुरुआत में कोई उन्हें पढ़े या नहीं, लेकिन समय के साथ यही लेखन व्यक्ति की जीवन यात्रा और इतिहास का हिस्सा बन जाता है।

'AI के दौर में इंसानों का लिखना और जरूरी'

बृजेश सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस युग में मशीनें एक सप्ताह में जितने शब्द तैयार कर रही हैं, उतने शब्द शायद मानव इतिहास में पहले कभी नहीं लिखे गए। ऐसे समय में इंसानों के लिए स्वयं लिखना और अपने विचार दर्ज करना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल सार्वजनिक ढांचों में से एक का मालिक है। देश को लगातार साइबर हमलों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन साइबर सुरक्षा क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों और पेशेवरों के योगदान से भारत वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत की प्रगति की मजबूत नींव साइबर सुरक्षा पर आधारित होगी।

साइबर सुरक्षा को सरल भाषा में समझाने की कोशिश

पुस्तक के लेखक डॉ. दुर्गा प्रसाद दुबे ने कहा कि साइबर सुरक्षा एक ऐसा विषय है जिसमें कई जटिल प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इस पुस्तक के माध्यम से इन प्रक्रियाओं को सरल और आम लोगों की समझ में आने वाली भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक पाठकों को साइबर सुरक्षा से जुड़े भ्रम और मिथकों को समझने तथा भविष्य की चुनौतियों के प्रति जागरूक बनाने में मदद करेगी। साथ ही यह संगठनों में साइबर सुरक्षा की सोच विकसित करने और अधिक भरोसेमंद डिजिटल वातावरण तैयार करने में भी उपयोगी साबित होगी।

'मोबाइल फोन आज सबसे बड़ी साइबर चुनौती'

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीषकुमार चौहान ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा के लिए सेना तैनात रहती है और देश के भीतर सुरक्षा के लिए पुलिस मौजूद रहती है। लेकिन आज हर व्यक्ति के हाथ में मौजूद मोबाइल फोन एक नई डिजिटल सीमा बन चुका है। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन वर्तमान समय की सबसे बड़ी साइबर सुरक्षा चुनौतियों में से एक है। इसके साथ ही भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बदलावों में से एक का अनुभव कर रहा है। जून 2025 में देश में इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या 100 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई, जिससे भारत एक विशाल डिजिटल इकोसिस्टम बन चुका है।

एक्सपर्ट्स ने भी साझा किए अपने विचार

कार्यक्रम में पूर्व नेशनल साइबर सुरक्षा समन्वयक लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पंत (रिटायर्ड) ने भी अपने विचार साझा किए और डॉ. दुर्गा प्रसाद दुबे के कार्य की सराहना की। वहीं ब्लूम्सबरी इंडिया पब्लिशिंग के मनीष खुराना ने पुस्तक का परिचय और उसकी विशेषताओं की जानकारी दी। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन से हुई थी जिसके बाद उपस्थित अतिथियों ने पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ था शुभारंभ

मंच पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के एमडी एवं सीईओ आशीषकुमार चौहान, पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पंत (सेवानिवृत्त), PWC इंडिया के रिस्क कंसल्टिंग सर्विसेज के पार्टनर एवं प्रमुख सिद्धार्थ विश्वनाथ, ब्लूम्सबरी इंडिया पब्लिशिंग के मनीष खुराना तथा पुस्तक के लेखक डॉ. दुर्गा प्रसाद दुबे मौजूद रहे। पुस्तक विमोचन के बाद ‘साइबर सिक्योरिटी बियॉन्ड टेक्नोलॉजी: एआई युग में नेतृत्व, लचीलापन और विश्वास’ विषय पर एक विशेष पैनल चर्चा का भी आयोजन किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा से जुड़ी वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।

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