पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तीन दिन की चीन यात्रा पर हैं, उन्होंने चीन के राष्ट्रपति से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने बैठक के बाद संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें भारत के जम्मू कश्मीर और लद्दाख का जिक्र है। इसके बाद पाकिस्तान का भारत के खिलाफ उसकी सोच एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। दोनों देशों के संयुक्त जारी बयान में कई ऐसे मुद्दों का जिक्र किया गया है, जिन पर पाकिस्तान पहले से भारत के खिलाफ बयान देता रहा है। कश्मीर मुद्दे पर चीन ने एक बार फिर पाकिस्तान के रुख का समर्थन किया है। इसके बाद भारत ने सख्त रुख दिखाया है।
पाकिस्तान और चीन के संयुक्त बयान में चीन की तरफ से कहा गया है कि कश्मीर मुद्दे का समाधान संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। बता दें कि चीन पहले भी कई बार कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है। आर्टिकल 370 हटाए जाने के समय भी चीन ने पाकिस्तान जैसी भाषा का इस्तेमाल किया था।
भारत ने दी चेतावनी
चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश के अनुचित उल्लेख के संबंध में मीडिया के प्रश्नों के उत्तर में, आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश के अनुचित उल्लेख को स्पष्ट रूप से खारिज करता है। भारत का रुख सुसंगत है और संबंधित पक्षों को भलीभांति ज्ञात है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे। किसी अन्य देश को इस पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।
चीन और पाकिस्तान के लिए भारत का बयान
तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) परियोजनाओं के संबंध में, जिनमें से कुछ भारत की संप्रभुता वाले क्षेत्र में हैं, हम अन्य देशों द्वारा पाकिस्तान के इन क्षेत्रों पर अवैध और जबरन कब्जे को मजबूत करने या वैध ठहराने के किसी भी प्रयास का दृढ़ता से विरोध और खंडन करते हैं, जो भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करता है। यह बात पाकिस्तानी और चीनी अधिकारियों को कई बार स्पष्ट रूप से बता दी गई है।
हमने तथाकथित 'सीमा पार जल संसाधनों' के संदर्भ भी देखे हैं। चीन और पाकिस्तान के बीच सहयोग के बारे में, चूंकि दोनों देशों की कोई सीमा नहीं लगती, इसलिए तथाकथित 'सीमा पार जल संसाधन सहयोग' का प्रश्न ही नहीं उठता। भारत ने पाकिस्तान और चीन के बीच हुए तथाकथित 1963 के सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है।
Latest India News