1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया 2047 तक कैसे विकसित होगा भारत, कहा- 'शिक्षा जगत की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा'

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया 2047 तक कैसे विकसित होगा भारत, कहा- 'शिक्षा जगत की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा'

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत को अपने मूल्यों के अनुसार विकसित देश की नई परिभाषा बनानी होगी। देश को विकसित बनाने में शिक्षा जगत का योगदान सबसे अहम होने वाला है।

Dharmendra pradhan- India TV Hindi
Image Source : X/DHRMENDRAPRADHAN शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को गुजरात के केवडिया में (वाइस चांसलर) कुलपतियों के चिंतन शिविर को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को याद किया। उन्होंने कहा कि देश को विकसित बनाने में शिक्षा जगत का योगदान सबसे ज्यादा होगा। इसके साथ ही उन्होंने विकसित राष्ट्र की नई परिभाषा गढ़ने पर जोर दिया, जो भारतीय मूल्यों पर आधारित हो।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश हैं। यहां हर वर्ग के कर्तव्य तय हैं। दुनिया की किसी दूसरी सभ्यता में हर वर्ग के कर्तव्यों पर इस तरह का चिंतन नहीं हुआ है। ऐसे में हमें पश्चिमी देशों से हटकर विकसित राष्ट्र की नई परिभाषा घोषित करनी होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने हमारे सामने 2047 तक भारत को विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा है। विकिस राष्ट्र की जो वैश्विक परिभाषा है, क्या हमारी भी वही परिभाषा होनी चाहिए? या हमे संवाद और परामर्श के माध्यम से अपनी अद्वितीय विरासत, मूल्यों और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए समृद्ध राष्ट्र की अपनी परिभाषा बनानी चाहिए? अब हम विकसित देश की एक भारतीय मॉडल की परिकल्पना कर रहे हैं, ऐसे समय में सबसे अधिक जिम्मेदारी शिक्षा जगत की है।

गुरुपूर्णिमा पर कुलपतियों को संबोधित किया

केवडिया में कुलपतियों के चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा "गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर, केवड़िया में कुलपतियों के चिंतन शिविर में भारत की उच्च शिक्षा के भविष्य को आकार देने वाले अग्रणी मस्तिष्कों को संबोधित करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। एक साझा मिशन के रूप में, यह दो दिवसीय चिंतन शिविर सभी शैक्षणिक नेताओं के लिए संस्थानों को आकार देने, पीढ़ियों को सशक्त बनाने, भारतीय शिक्षा का एक नया मॉडल बनाने और एक उज्जवल भविष्य बनाने के लिए मिलकर काम करने का एक जीवंत मंच है।"

भारत की उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा, "माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत के उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में आमूल-चूल परिवर्तन आया है। यह आमूल-चूल परिवर्तन हमारे कुलपतियों और संकायों के अथक प्रयासों के बिना संभव नहीं होता। हमें गहन सुधारों के लिए अपने प्रयास जारी रखने होंगे। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय उच्च शिक्षा को नए सिरे से परिभाषित करने का एक पीढ़ीगत अवसर है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दृष्टिकोण को वास्तविकता में बदलने के लिए हमारे पास एक ठोस खाका होना चाहिए।"

कुलपतियों से की खास अपील

धर्मेंद्र प्रधान ने कुलपतियों से अपील करते हुए कहा, "2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर, हम एक अनोखे मोड़ पर खड़े हैं। इस महत्वपूर्ण क्षण में, हमारे उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। विशेष रूप से भारतीयता के 'मूल्यों और विरासत' के आधार पर भारत के भविष्य को आकार देने में शिक्षा संस्थान अहम रोल अदा करेंगे। मैं अपने सभी कुलपतियों और शैक्षणिक नेताओं से आह्वान करता हूं कि वे अपने-अपने विश्वविद्यालयों के लिए अपना अनूठा राष्ट्रीय शिक्षा नीति कार्यान्वयन मॉडल तैयार करें। छात्र-प्रधान दृष्टिकोण अपनाएं और एक ऐसी नई शैक्षिक संस्कृति और शैक्षिक मॉडल स्थापित करने की दिशा में काम करें जो समावेशी, समग्र, भविष्योन्मुखी और भारतीयता में निहित हो। आइए हम न केवल संस्थानों, बल्कि विरासतों को भी आकार दें, आइए हम न केवल करियर, बल्कि सभ्यता को भी आकार दें।

यह भी पढ़ें-

Vande Bharat ने शताब्दी को दिया झटका, जान लीजिए रेलवे का नया फैसला; 1 सितंबर से दिखेगा असर

'आधार, राशन कार्ड, वोटर-ID को भी प्रूफ मानें', बिहार में वोटर लिस्ट रिविजन पर SC का सुझाव, 28 जुलाई को अगली सुनवाई

 

 

Latest India News