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कांवड़िए लौटे और हरिद्वार में गंगा नदी के घाटों पर छोड़ गए 7 हजार मीट्रिक टन कचरा! सफाई में जुटा प्रशासन

हरिद्वार से कांवड़िए लौटे लेकिन अपने पीछे 7 हजार मीट्रिक टन कचरा छोड़ गए। इस कचरे को शहर से बाहर ले जाने में 89 बड़े ट्रक्स का सहारा लेना पड़ा।

Haridwar Kanwar Yatra Waste- India TV Hindi
Image Source : REPORTERS INPUT कांवड़िए हरिद्वार से लौटे और पीछे छोड़ गए 7 हजार मीट्रिक टन कचरा!

कांवड़ यात्रा के चलते उत्तराखंड के हरिद्वार का पूरा प्रशासन लगातार सफाई अभियान में जुटा है। एक हजार से ज्यादा कर्मचारी रात भर गंगा के घाटों से वो गंदगी साफ करते रहे जो कांवड़िए फैलाकर गए हैं। कांवड यात्रा संपन्न हुई, कांवड़िए तो गंगाजल लेकर लौट गए लेकिन गंगा के घाटों पर पुराने कपड़े, जूते-चप्पल, पॉलीथीन्स, खाने का सामान और फटे पुराने बैग वहीं छोड़ गए।

गंगा के घाट पर 7 हजार मीट्रिक टन कचरा

कांवड़ यात्रा खत्म होने के बाद गंगा के घाट गंदगी से भरे थे। हर तरफ गीले कपड़े और सड़ा हुआ खाना पड़ा था। हर तरफ बदबू थी। इसके बाद हरिद्वार नगर निगम के कर्मचारियों ने सफाई अभियान शुरू किया और 24 घंटे में गंगा के घाटों से सात हजार मीट्रिक टन कचरा इकट्ठा किया।

89 से ज्यादा बड़े ट्रक्स में भरकर हरिद्वार से बाहर ले जाया गया कूड़ा

कांवड़िए इतना कूड़ा-कचरा फैलाकर गए हैं कि इसे समेटने के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें लगानी पड़ीं। 89 से ज्यादा बड़े ट्रक्स में कचरे को भरकर हरिद्वार से बाहर ले जाया गया। अफसरों ने बताया कि इस बार 4 करोड़ 80 लाख से ज्यादा कांवड़िए हरिद्वार आए थे, इसलिए व्यवस्था में थोड़ी मुश्किल तो आई। लेकिन प्रशासन रोज रात में सफाई अभियान चलाता था। दिनभर का ज्यादातर कचरा रात में साफ कर दिया जाता था।

आखिरी दो दिन में नहीं हो पाई थी सफाई

लेकिन कांवड़ यात्रा के आखिरी दो दिनों में कांवड़ियों की संख्या बढ़ती है। श्रद्धालु डाक कांवड़ लेकर आते हैं, इसलिए आखिरी दो दिनों में सफाई नहीं पाई थी और दो दिन में ही इतना सारा कचरा इकट्ठा हो गया।

कांवड़िए सफाई का ध्यान रखते तो शायद इतनी गंदगी ना होती

मुख्य नगर आयुक्त नंदर कुमार के मुताबिक, सुभाष घाट, नई घाट, अलकनंदा और विष्णु घाट को भी 95 प्रतिशत साफ कर दिया गया है। साफ सफाई के बाद आज गंगा आरती भी धूमधाम से हुई। गंगा आरती में पहुंचे भक्तों ने कहा कि प्रशासन ने अच्छा काम किया है लेकिन अगर कांवड़िए भी साफ-सफाई का ख्याल रखते तो न गंगा में गंदगी होती, न प्रशासन को इतनी मेहनत करनी पड़ती। इससे पहले हाल ही में हरिद्वार में गंगनहर में डूबने से 4 कांवड़ियों की मौत हो गई थी। इस घटना में एक को बचाने में चारों की जान चली गई थी। ये लोग चंडीगढ़ से हरिद्वार आए थे।

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