नई दिल्ली: भारत और लेसोथो ने अपने द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करते हुए विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत और संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि दोनों देशों के बीच संयुक्त द्विपक्षीय सहयोग आयोग (JBCC) की छठी बैठक 30 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित की गई। इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता विदेश मंत्रालय में पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका प्रभाग के संयुक्त सचिव जनेश काइन और लेसोथो के विदेश एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध मंत्रालय के प्रधान सचिव थाबांग लेखेला ने की।
आपसी समन्यवय को मजबूत करने पर हुई चर्चा
विदेश मंत्रालय ने X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि बैठक के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की। विशेष रूप से विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर आपसी समन्वय को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि दोनों देश विकास से जुड़े क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे के साथ समन्वय बढ़ाएंगे, ताकि साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी सहयोग सुनिश्चित किया जा सके।
मार्च 2004 में हुई थी JBCC की स्थापना
लेसोथो के विदेश एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने अपने लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक संबंधों की फिर से पुष्टि की और विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को और आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। बता दें कि JBCC की स्थापना मार्च 2004 में दोनों देशों के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत की गई थी। इसकी पहली बैठक मार्च 2009 में नई दिल्ली में आयोजित हुई थी। यह व्यवस्था बारी-बारी से भारत की राजधानी नई दिल्ली और लेसोथो की राजधानी मासेरू में आयोजित की जाती है।
कई MoUs को आगे बढ़ाने पर बनी सहमति
छठे सत्र में दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसमें नई दिल्ली स्थित लेसोथो के राजनयिक मिशन के प्रतिनिधियों के अलावा व्यापार, शिक्षा, कृषि, खाद्य सुरक्षा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों के अधिकारी भी शामिल रहे। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने कई प्रस्तावित MoUs को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई और उन्हें जल्द से जल्द हस्ताक्षरित करने का फैसला किया। बैठक का समापन दक्षिण-दक्षिण सहयोग के माध्यम से सतत विकास को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग मजबूत करने की नई प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
भारत ने लेसोथो को ISA से जुड़ने का न्योता दिया
भारत ने इस दौरान लेसोथो को इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) से जुड़ने का निमंत्रण भी दिया। भारत का कहना है कि ये दोनों मंच नवीकरणीय ऊर्जा और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। बैठक में यह भी तय किया गया कि भारत-लेसोथो संयुक्त द्विपक्षीय सहयोग आयोग (JBCC) की सातवीं बैठक लेसोथो की राजधानी मासेरू में आयोजित की जाएगी। इसकी तारीख दोनों देशों के बीच राजनयिक माध्यमों से आपसी सहमति के बाद तय की जाएगी।
Image Source : India TVअफ्रीका में लेसोथो की लोकेशन बेहद अनोखी है।
लेसोथो कहां है और इस देश की क्या खासियत है?
लेसोथो अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक छोटा लेकिन अनोखा देश है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह चारों ओर से केवल दक्षिण अफ्रीका से घिरा हुआ है, इसलिए इसे दुनिया के गिने-चुने एनक्लेव देशों में शामिल किया जाता है। पूरा देश समुद्र तल से लगभग 1,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है, जिसके कारण इसे 'किंगडम इन द स्काई' या आसमान में बसा देश भी कहा जाता है। लेसोथो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पर्वतीय भूभाग, जल संसाधनों, हीरा खदानों और वस्त्र उद्योग के लिए जाना जाता है। इसकी राजधानी मासेरू है और इसकी अर्थव्यवस्था कृषि, कपड़ा उद्योग तथा दक्षिण अफ्रीका के साथ व्यापार पर काफी हद तक निर्भर करती है।
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