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'FCRA बिल हमारा आतंरिक मामला, उसपर निर्णय संसद लेगी', भारतीय विदेश मंत्रालय की अमेरिका को नसीहत

FCRA बिल को लेकर अमेरिकी नेताओं के कॉमेंट पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का बयान आया है, जिसमें उन्होंने साफ कह दिया कि विधायी मामलों में भारत की संसद अपने फैसले खुद लेती है।

अमेरिका के नेताओं की FCRA...- India TV Hindi
Image Source : PTI (फाइल फोटो) अमेरिका के नेताओं की FCRA बिल पर बयानबाजी पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का बयान।

FCRA बिल पर अमेरिका के नेताओं की बयानबाजी पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जवाब दिया है। रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत के विधायी मामलों में हमारे देश की संसद अपने निर्णय स्वयं लेती है। ऐसा कहकर रणधीर जायसवाल ने साफ कर दिया है कि कोई भी बाहरी दबाव भारत सरकार के फैसलों को प्रभावित नहीं करेगा। जानें FCRA बिल पर अमेरिकी नेताओं की तरफ से क्या बयानबाजी हुई है।

अमेरिका भी विदेशी फंडिंग पर करता है कंट्रोल

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हमने FCRA पर टिप्पणियां देखी हैं। भारत से जुड़े विधायी मामले हमारे आंतरिक मामले हैं, जिन पर भारत की संसद फैसला लेती है। मैं यह भी बताना चाहूंगा कि अमेरिका समेत कई देश विदेशी फंड के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं।'

जान लें कि अमेरिकी सांसद Riley M. Moore ने अपने X पोस्ट में कहा था, 'भारत में ईसाई तब से हैं जब हमारे प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ ही दशकों बाद सेंट थॉमस द एपोसल मालाबार तट पर आए थे। लेकिन ईसाइयों के इतने लंबे इतिहास के बावजूद, भारत की संसद 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन अमेंडमेंट' (FCRA) नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है, ताकि सरकार चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं का नियंत्रण अपने हाथ में ले सके। यह ईसाइयों पर सीधा हमला है। अगर यह बिल इसी तरह आगे बढ़ता है, तो यह भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों में बड़ी चिंता का विषय बन जाएगा।'

क्यों हो रहा FCRA Amendment Bill 2026 का विरोध?

गौरतलब है कि केंद्र सरकार अगले हफ्ते लोकसभा में FCRA Amendment Bill 2026 पेश कर सकती है। इस बीच, भारत के कई ईसाई संगठन और चर्च इस बिल की खिलाफत कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह नया बिल उनके संस्थानों को टारगेट कर सकता है और उनके अधिकारों पर प्रभाव डाल सकता है। वहीं, केंद्र सरकार कह रही है कि इस कानून का मकसद विदेशी फंडिंग को लेकर पारदर्शिता, जवाबदेही को मजबूत करना और राष्ट्रीय सुरक्षा है।

गृह मंत्री से भी मिल चुके हैं ईसाई समुदाय के प्रतिनिधि

इसको लेकर हाल ही में ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की। इसमें उन्होंने बिल को वापस लेने या उसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की डिमांड की। इसके बाद, अमित शाह ने आश्वासन दिया कि उनकी चिंताओं पर विचार होगा। सरकार के अन्य सदस्यों के साथ भी इसको लेकर चर्चा की जाएगी।

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