नीति आयोग में बंगाल के दो दिग्गजों की एंट्री, अशोक लाहिड़ी को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी, गोवर्धन दास सदस्य
केंद्र सरकार के नीति निर्माण के सबसे अहम संस्थान नीति आयोग में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नई टीम में बंगाल के दो दिग्गजों को अहम जिम्मेदारी दी गई है।

नई दिल्ली: देश के नीति निर्माण में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले संस्थान नीति आयोग में पश्चिम बंगाल से दो प्रतिष्ठित नामों को एंट्री मिली है। अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी नीति आयोग के उपाध्यक्ष बनेंगे और जबकि वैज्ञानिक गोवर्धन दास की नियुक्ति सदस्य के तौर पर होगी। यह नियुक्तियां न केवल विशेषज्ञता का प्रतिनिधित्व करती हैं, बल्कि देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में बंगाल के योगदान को भी सामने लाती हैं। लाहिड़ी सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार और 15वें वित्त आयोग के सदस्य हैं। जबकि गोवर्धन दास भोपाल स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक हैं।
कौन हैं डॉ.अशोक लाहिड़ी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभालने के बाद 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में योजना आयोग की जगह नीति आयोग का गठन किया था। अब इस संस्था का नेतृत्व डॉ. अशोक लाहिड़ी करेंगे। उन्हें नीति आयोग के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। डॉ. अशोक लाहिड़ी देश के सबसे अनुभवी और वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों में से एक हैं। उनका करियर 4 दशक से भी लंबा है। मुख्य आर्थिक सलाहकार से लेकर वित्त आयोग के सदस्य तक, डॉ. लाहिड़ी ने नीति-निर्माण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अलावा वे वर्ल्ड बैंक, IMF और एशियाई विकास बैंक जैसी वैश्विक संस्थाओं से भी जुड़े रहे हैं।
दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र लाहिड़ी को कोलकाता की बौद्धिक परंपरा का प्रमुख चेहरा माना जाता है। इनकी गिनती बंगाल के विकास और प्रगति के लिए आवाज़ उठाने वाले शख्स के तौर पर भी होती है।
शुभेंदु अधिकारी ने दी शुभकामनाएं
पश्चिम बंगाल में बीजेपी कद्दवार नेता शुभेंदु अधिकारी ने डॉ. अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा-'हम सभी पश्चिम बंगालवासियों के लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि डॉ. लाहिड़ी को भारत की शीर्ष संस्था में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी गई है। एक अर्थशास्त्री और पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में डॉ. लाहिड़ी का विशाल अनुभव, और एक विधायक के तौर पर उनका अनुभव, ये दोनों मिलकर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के विज़न को निस्संदेह एक नई गति प्रदान करेंगे। राष्ट्र सेवा में उनके कार्यकाल के अत्यंत सफल और प्रभावशाली रहने की कामना करता हूं।'
कौन हैं डॉ. गोवर्धन दास?
वहीं नीति आयोग के नए सदस्य डॉ. गोवर्धन दास एक जाने-माने मॉलिक्यूलर साइंस के प्रोफेसर हैं। इम्यूनोलॉजी, संक्रामक रोग और सेल बायोलॉजी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखते हैं। लगभग तीन दशकों के अपने वैज्ञानिक करियर में डॉ. दास ने कई उपलब्धियां हासिल की है। डॉ. दास को तपेदिक (Tuberculosis) के रोगजनन (pathogenesis) पर किए गए उनके शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
विदेश के प्रतिष्ठित शोध संस्थानों में काम किया
उन्होंने अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी और ह्यूस्टन मेथोडिस्ट हॉस्पिटल तथा दक्षिण अफ्रीका की क्वाज़ुलु-नटाल यूनिवर्सिटी और नेशनल रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों में काम किया है। उन्होंने अपनी मातृभूमि की सेवा करने के लिए घर लौटने का फैसला किया। वे जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रह चुके हैं और फिलहाल IISER Bhopal के निदेशक हैं। उनकी व्यक्तिगत कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है। गरीबी, संघर्ष और सामाजिक चुनौतियों के बीच उन्होंने शिक्षा के दम पर वैश्विक पहचान बनाई।
संघर्ष में बीता बचपन
बांग्लादेश से आए हिंदू दलित शरणार्थी माता-पिता के घर डॉ. गोवर्धन दास का जन्म हुआ था। उनके माता-पिता को उत्पीड़न से बचने के लिए अपना सब कुछ पीछे छोड़कर आना पड़ा था। फिर बंगाल में बेहद कठिन परिस्थितियों में उनका बचपन बीता। उनके पिता एक गरीब किसान थे। उन्हें सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइट की रोशनी में पढ़ाई करनी पड़ती थी। पश्चिम बंगाल में हुए दंगों में उन्हें अपने परिवार के 17 सदस्यों को खोने का भयानक दुख भी झेलना पड़ा था। इन सब के बीच भी राष्ट्र-निर्माण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता, अब बंगाल और पूरे देश में असंख्य लोगों के लिए आशा की किरण और प्रेरणा का स्रोत बनेगी।