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इंसानियत शर्मसार! अस्पताल से नहीं मिला शव वाहन, गिरवी रखना पड़ा राशन कार्ड; परिवार ने खुद की व्यवस्था

ओडिशा के नबरंगपुर जिले में एक बच्चे की मौत के बाद शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया। यहां अस्पताल की तरफ से शव वाहन की व्यवस्था नहीं की गई। इसके बाद परिजनों को राशन कार्ड गिरवी रखकर पैसे मिले और फिर उससे खुद शव वाहन की व्यवस्था की।

खुद करनी पड़ी शव वाहन की व्यवस्था।- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT खुद करनी पड़ी शव वाहन की व्यवस्था।

ओडिशा के नबरंगपुर जिले से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है। यहां एक परिवार को अपने मृत नवजात बेटे का शव घर लाने के लिए कथित तौर पर राशन कार्ड गिरवी रखना पड़ा। परिवार का आरोप है कि सरकारी महाप्रयाण वाहन नहीं मिलने के कारण उन्हें 5,000 रुपये देकर निजी एंबुलेंस किराये पर लेनी पड़ी। दरअसल, ओडिशा के सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों की मदद के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। लेकिन नबरंगपुर जिले के एक गरीब परिवार ने आरोप लगाया है कि जरूरत के समय उन्हें सरकारी महाप्रयाण सेवा का लाभ नहीं मिल सका। परिवार के अनुसार, बच्चे की मौत के बाद उन्होंने अस्पताल से शव को घर ले जाने के लिए वाहन मांगा, लेकिन काफी इंतजार के बावजूद उन्हें वाहन नहीं मिला।

राशन कार्ड गिरवी रखकर की एंबुलेंस

आखिरकार, परिवार को अपने मृत बेटे का शव गांव ले जाने के लिए राशन कार्ड गिरवी रखकर पैसे जुटाने पड़े। इसके बाद 5,000 रुपये खर्च कर निजी एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। जानकारी के अनुसार, नबरंगपुर जिले के डालेगुड़ा गांव की रहने वाली अंबिका नायक ने 29 सितंबर को पापड़ाहांडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक बेटे को जन्म दिया था। नवजात बच्चा कम वजन का था, इसलिए उसे बेहतर इलाज के लिए पहले नबरंगपुर जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां से बच्चे को आगे के इलाज के लिए कोरापुट स्थित शहीद लक्ष्मण नायक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया गया।

बच्चे की देर रात हो गई मौत

परिवार के अनुसार, अस्पताल में इलाज के दौरान गुरुवार देर रात बच्चे की मौत हो गई। बेटे की मौत से परिवार पहले ही दुख में डूबा हुआ था। इसके बाद शव को अपने गांव ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था करना उनके सामने एक बड़ी परेशानी बन गया। परिवार का आरोप है कि डॉक्टरों ने उन्हें बच्चे का शव घर ले जाने के लिए महाप्रयाण सेवा का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने संबंधित कर्मचारियों से वाहन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। लेकिन परिवार के मुताबिक, उन्हें बताया गया कि महाप्रयाण वाहन के इंजन में खराबी है और वह करीब 60 किलोमीटर की दूरी तय नहीं कर सकता।

सरकारी वाहन देने से इनकार

बच्चे की मां अंबिका नायक ने अपना दुख बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने मृत बेटे को घर ले जाने के लिए सरकारी वाहन मांगा था, लेकिन उन्हें बताया गया कि वाहन में इंजन की समस्या है और वह इतनी दूर नहीं जा सकता। अंबिका के अनुसार, ऐसी स्थिति में परिवार को पैसे जुटाने के लिए अपना राशन कार्ड गिरवी रखना पड़ा, ताकि वे निजी एंबुलेंस किराये पर लेकर बेटे का शव घर पहुंचा सकें।

खुद शव ले जाने की करनी पड़ी व्यवस्था

मृत बच्चे के रिश्तेदार पुष्टा भतरा ने भी महाप्रयाण सेवा को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, परिवार को बताया गया था कि महाप्रयाण वाहन रात करीब 1 बजे पहुंच जाएगा। इसी उम्मीद में परिवार इंतजार करता रहा, लेकिन वाहन नहीं आया। पुष्टा भतरा ने बताया कि परिवार ने अगली सुबह करीब 10 बजे तक इंतजार किया। जब काफी देर तक कोई वाहन नहीं पहुंचा, तो उन्होंने खुद ही शव को गांव ले जाने की व्यवस्था करने का फैसला किया।

अस्पताल पर गंभीर आरोप

परिवार का आरोप है कि इस दौरान उन्हें अस्पताल में ही बच्चे को दफनाने या शव को मोटरसाइकिल से ले जाने का सुझाव भी दिया गया था। हालांकि, परिवार अपने बेटे का शव गांव ले जाना चाहता था, ताकि अंतिम संस्कार अपनी परंपराओं के अनुसार कर सके। आखिरकार, परिवार ने राशन कार्ड गिरवी रखकर पैसे जुटाए और 5,000 रुपये में निजी एंबुलेंस किराये पर ली। इसके बाद नवजात का शव गांव पहुंचाया गया, जहां परिवार ने अपनी परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार किया। (इनपुट- शुभम कुमार)

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