ओडिशा के कंधमाल जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला ने ब्रह्मपुर स्थित महाराजा कृष्ण चंद्र गजपति मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक दुर्लभ शारीरिक स्थिति वाले बच्चे को जन्म दिया है। नवजात के शरीर से दो सिर जुड़े हुए हैं। जन्म के तुरंत बाद बच्चे को अस्पताल की विशेष यानी एसएनसीयू में भर्ती कराया गया है। यहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम बच्चे की सेहत पर लगातार नजर रख रही है। सामने आई जानकारी के अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद उसे तत्काल एसएनसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। यहां बाल रोग विशेषज्ञों और अन्य चिकित्सकों की टीम उसकी निगरानी कर रही है। डॉक्टर बच्चे की सांस लेने की स्थिति, हृदय गति और शरीर के अन्य जरूरी संकेतों की लगातार जांच कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि महिला कंधमाल जिले की रहने वाली है। प्रसव के दौरान विशेष चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वह ब्रह्मपुर आई थी। यहीं एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बच्चे का जन्म हुआ। बच्चे की शारीरिक स्थिति को देखते हुए अस्पताल के डॉक्टर विशेष सावधानी बरत रहे हैं। फिलहाल नवजात की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अस्पताल प्रशासन की ओर से नवजात को हर संभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। बता दें कि भारत के कई हिस्सों में बच्चों में जन्म के समय ऐसे कई अनोखे मामले सामने आते रहते हैं।
डॉक्टरों ने क्या बताया?
डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह के मामलों में जुड़वां बच्चे जन्म के समय शारीरिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। इस तरह के दुर्लभ मामलों में बच्चे की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए विस्तृत चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है। डॉक्टरों का कहना है कि नवजात की सेहत का पूरा आकलन करने में समय लगेगा।
बच्चे को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया
एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के बाल रोग विभाग के डॉ. मानस रंजन दास ने कहा- “फिलहाल बच्चे की हालत गंभीर है। उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है और सांस लेने में परेशानी हो रही है। अल्ट्रासाउंड जांच में पता चला है कि बच्चे का दिल और लिवर साझा हैं। नवजात का वजन करीब 2.6 किलोग्राम है। बच्चे के दो सिर, दो पैर और दो हाथ हैं, लेकिन जननांगों का केवल एक ही समूह है। उसकी रीढ़ की हड्डी दो हिस्सों में बंटी हुई है और मल त्यागने के लिए कोई रास्ता नहीं है। बच्चे की स्थिति गंभीर बनी हुई है। आगे के इलाज के लिए उसे एम्स रेफर करने पर विचार किया जा सकता है।"
लोगों के बीच चर्चा का विषय
एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में डॉक्टरों की टीम नवजात की स्थिति को स्थिर बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। बच्चे की सांस, हृदय गति और अन्य जरूरी शारीरिक गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। अस्पताल परिसर में इस दुर्लभ जन्म को लेकर लोगों के बीच चर्चा हो रही है। वहीं, परिवार के सदस्य और शुभचिंतक नवजात के स्वस्थ होने और उसके जीवन की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। फिलहाल अस्पताल प्रशासन का मुख्य ध्यान बच्चे को जरूरी चिकित्सा सहायता देने और उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने पर है। (रिपोर्ट: शुभम कुमार)
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