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राष्ट्रपति मुर्मू अब राफेल फाइटर जेट से भरेंगी उड़ान, इससे पहले सुखोई-30 से नाप चुकी हैं आसमान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बुधवार को हरियाणा के अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से राफेल फाइटर जेट में उड़ान भरेंगी। इससे पहले उन्होंने 2023 में असम के तेजपुर से सुखोई-30 में उड़ान भरी थी। राफेल जेट ने हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता में अहम रोल अदा किया था।

President Droupadi Murmu Rafale flight, Ambala Air Force Station- India TV Hindi
Image Source : X.COM/RASHTRAPATIBHVN राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सूखोई-30 लड़ाकू विमान में उड़ान भर चुकी हैं।

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बुधवार को हरियाणा के अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से राफेल फाइटर जेट में उड़ान भरेंगी। बता दें कि राफेल फाइटर जेट्स का इस्तेमाल हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' में किया गया था, जो पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए दहशतगर्द हमले के जवाब में शुरू किया गया था। राष्ट्रपति भवन की ओर से मंगलवार को जारी एक बयान में कहा गया, 'राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बुधवार को हरियाणा के अंबाला जाएंगी, जहां वह राफेल से उड़ान भरेंगी।'

पहले भी फाइटर जेट में उड़ान भर चुकी हैं मुर्मू

बता दें कि भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर मुर्मू इससे पहले भी आसमान की सैर कर चुकी हैं। 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर वायु सेना अड्डे से उन्होंने सुखोई-30 लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी। इससे वे बतौर राष्ट्रपति इस जेट से उड़ान भरने वाली तीसरी शख्सियत और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बन गई थीं। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI जेट में उड़ान भरी थी। कलाम ने 8 जून 2006 को पुणे के पास लोहेगांव वायुसेना अड्डे से और पाटिल ने 25 नवंबर 2009 को इसी अड्डे से उड़ान भरी थी।

'ऑपरेशन सिंदूर' में राफेल ने निभाया अहम रोल

फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन द्वारा बनाए गए राफेल लड़ाकू विमान को सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। पहले 5 राफेल विमान 27 जुलाई 2020 को फ्रांस से लाए गए थे और इन्हें 17वीं स्क्वाड्रन 'गोल्डन एरो' में शामिल किया गया।'ऑपरेशन सिंदूर' पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में आतंकी ढांचों को तबाह करने के लिए 7 मई को शुरू किया गया था। पाकिस्तान को बड़े-बड़े जख्म देने वाले इन हमलों में राफेल जेट्स का अहम रोल रहा था। हमलों के बाद 4 दिन तक भीषण झड़पें हुईं, जो 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति के साथ खत्म हो गईं। (PTI)

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