A
  1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. दिल्ली विधानसभा में मनाया गया 'संविधान हत्या दिवस', रजत शर्मा ने इमरजेंसी के दिनों को किया याद

दिल्ली विधानसभा में मनाया गया 'संविधान हत्या दिवस', रजत शर्मा ने इमरजेंसी के दिनों को किया याद

दिल्ली विधानसभा में 'संविधान हत्या दिवस' मनाया गया, जहां आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने इमरजेंसी के दौरान पुलिस दमन और जेल यात्रा की घटनाओं को याद किया।

Rajat Sharma, Emergency in India, Samvidhan Hatya Diwas- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा में आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता, डिप्टी स्पीकर मोहन बिष्ट, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। सत्र में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र पर हुए हमले को याद किया गया और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर रजत शर्मा ने याद किया कि कैसे सिर्फ 17 साल की उम्र में उन्होंने इमरजेंसी के दौर को बेहद करीब से देखा था।

'मेरी उम्र उस समय सिर्फ 17 साल थी'

इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा ने अपने भाषण में आपातकाल के दौरान के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, 'आप सभी जानते हैं कि आपातकाल कैसे लगा था। मेरी उम्र उस समय सिर्फ 17 साल थी, मगर उस रात क्या हुआ था, 50 साल पहले की बात मुझे आज भी याद है। जय प्रकाश नारायण जी ने एक छात्र समिति बनाई थी। अरुण जी ने उस समिति का नेतृत्व किया। अरुण जी के पिता ने उन्हें घर के पीछे से निकाला। अरुण जी कैंपस में आ गए। फिर विजय गोयल जी और हम चार-पांच लोग दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस में नारे लगाने लगे, 'नौजवानों का खून लगा है, इंदिरा तेरे हाथों में।' अरुण जी बोल रहे थे, धीरे-धीरे पुलिस बढ़ने लगी और फिर उन्हें पुलिस ले गई।'

'हमने अखबार निकालने का फैसला किया'

रजत शर्मा ने आगे बताया, 'हमने अपने नेता को छुड़ाने के लिए पुलिस स्टेशन का घेराव किया। पुलिस ने हमें बताया कि आपातकाल में तुम्हें गोली तक मारी जा सकती है। विजय गोयल के पिता को गिरफ्तार कर लिया गया था। मेरे घर भी पुलिस गई। फिर हमने तय किया कि हम घर नहीं जाएंगे। हमने सोचा, अब क्या करें? तो हमने अखबार निकालने का फैसला किया। मेरी लेखन शैली अच्छी थी। हम 400 तक साइक्लोस्टाइल पेपर निकालते थे और रात को स्टूडेंट्स, टीचर्स, वहां के SHO और SP के घर तक वो पर्चे डाल आते थे। वही से मेरे पत्रकारिता का सफर बिना ट्रेनिंग के शुरू हुआ।'

'जज ने बिना सुने मुझे जेल भेज दिया'

रजत शर्मा ने अपनी गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा, 'कुछ देर बाद, विजय गोयल के जाने के बाद पुलिस आई, मुझे मारा, हथकड़ी लगाकर ले गई। मुझसे पूछा कि मदन लाल खुराना से कहां मुलाकात होती है। मैंने कहा, मैं उन्हें नहीं जानता, विजय गोयल को जानता हूं। पुलिस ने विजय गोयल को फोन करवाया। मैंने विजय से कहा, 'दाल में कुछ काला है।' यह सुनकर पुलिस ने मुझे रात भर पीटा, खून भी निकला। अगले दिन कोर्ट में पेश किया गया। जज ने बिना सुने मुझे जेल भेज दिया। जेल में मुझे पॉलिटिकल वार्ड के बजाय क्रिमिनल्स के साथ मुंडाखाना में रखा गया। वहां सब चोर और हत्यारे थे। पॉलिटिकल वार्ड संघ के शिविर जैसा था। महीनेभर जेल में रहा, मेरे भाई ने बड़ी मुश्किल से मेरी बेल कराई।'

'हमने सत्याग्रह किया और दोबारा तिहाड़ गए'

रजत शर्मा ने आगे कहा, 'जेल में मुझे संघ के बारे में पता चला कि कैसे वे सत्याग्रह की तैयारी कर रहे थे। लॉ फैकल्टी में हमने सत्याग्रह किया और दोबारा तिहाड़ गए। वहां पढ़ने का मौका मिला। कभी खबर आती थी कि हमें साइबेरिया के रेगिस्तान में छोड़ देंगे, कभी खबर आती थी कि पानी के जहाज में ले जाकर डुबो देंगे।' उन्होंने आपातकाल के अंत का जिक्र करते हुए कहा, 'जब चुनाव हुए और नतीजे आए, तो लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। लोगों के मन में आपातकाल को लेकर गहरी नाराजगी थी। उस समय अखबार बंद थे, सिर्फ दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो ही सुनाई देता था। लेकिन जब पब्लिक मीटिंग शुरू हुई, तो रामलीला मैदान में सैलाब आ गया, सारी सड़कें भर गईं। उस समय सरकार ने 'बॉबी' फिल्म लगाई थी ताकि कम लोग आएं।'

विजेंद्र गुप्ता ने भी इमरजेंसी को किया याद

विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने इमरजेंसी को याद करते हुए अपने संबोधन में कहा, 'युगों-युगों तक यह याद रखना चाहिए कि कैसे असंवैधानिक तरीके से लोकतंत्र की हत्या की गई। इसे न भूलें, न क्षमा करें। आज तक आपातकाल के आरोपियों को सजा नहीं मिली। शाह कमीशन ने जो किया, वह पर्याप्त नहीं था। बाबासाहेब के संविधान को बदलने की कोशिश की गई। यह उन लोगों के लिए सबक है जो आज संविधान की दुहाई देते हैं। आपातकाल लगाकर संविधान में 'सोशलिज्म' और 'सेकुलरिज्म' जैसे शब्द जोड़े गए। संविधान को इस तरह बदलने की कोशिश की गई ताकि इंदिरा गांधी हमेशा सत्ता में रहें। कांग्रेस पार्टी के डीएनए में तानाशाही है।'

Latest India News