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आवारा कुत्तों को सड़क पर खाना खिलाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'इन्हें अपने घर में क्यों नहीं खिलाते?'

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में आवारा कुत्तों को सड़क पर खाना खिलाने पर सवाल उठाते हुए याचिकाकर्ता से पूछा कि वह इन्हें अपने घर में क्यों नहीं खिलाते। कोर्ट ने मामले को अन्य याचिका से जोड़ दिया है और अब इस पर सुनवाई करेगा।

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Image Source : PTI कई इलाकों में आवारा कुत्तों की वजह से काफी समस्या हो रही है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नोएडा में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई की। याचिका में दावा किया गया था कि याचिकाकर्ता को कुत्तों को खाना खिलाने के कारण परेशान किया जा रहा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल किया, 'आप अपने घर में इन कुत्तों को खाना क्यों नहीं खिलाते?' बता दें कि देश के कई इलाकों में आवारा कुत्ते एक बड़ी समस्या का रूप ले चुके हैं और आए दिन इनके द्वारा लोगों पर हमले की खबरें आती रहती हैं।

'अपने घर में इन कुत्तों को खाना खिलाइए'

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, 'क्या हमें हर गली और सड़क को इन बड़े दिलवाले लोगों के लिए खुला छोड़ देना चाहिए? क्या जानवरों के लिए सारी जगह है और इंसानों के लिए कोई जगह नहीं? अपने घर में इन कुत्तों को खाना खिलाइए, कोई आपको रोक नहीं रहा।' कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अपने घर में एक शेल्टर खोल लें और सभी आवारा कुत्तों को वहीं खाना खिलाएं।

याचिकाकर्ता के वकील ने इस मुद्दे पर क्या कहा?

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वे एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स 2023 के नियम 20 का पालन कर रहे हैं, जो कहता है कि स्थानीय निवासी कल्याण समितियों या अपार्टमेंट मालिक समितियों को अपने क्षेत्र में आवारा जानवरों को खाना खिलाने की व्यवस्था करनी चाहिए। वकील ने बताया कि ग्रेटर नोएडा में नगर निगम ऐसी जगह बना रहा है, लेकिन नोएडा में ऐसा नहीं हो रहा। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी जगहों पर खाना खिलाने की व्यवस्था होनी चाहिए जहां लोगों का आना-जाना कम हो।

'सुबह टहलने वाले लोग भी खतरे में हैं'

वकील की दलील पर बेंच ने कहा, 'क्या आप सुबह साइकिल चलाते हैं? एक बार कोशिश करके देखिए, फिर पता चलेगा।' जब वकील ने कहा कि वे सुबह टहलते हैं और कई कुत्ते देखते हैं, तो कोर्ट ने जवाब दिया, 'सुबह टहलने वाले लोग भी खतरे में हैं। साइकिल और दोपहिया वाहन चलाने वाले तो और भी ज्यादा खतरे में हैं।' कोर्ट ने इस याचिका को एक अन्य समान मामले के साथ जोड़ दिया और सुनवाई टाल दी।

मामले को लेकर हाई कोर्ट भी गया था याचिकाकर्ता

बता दें कि इसके पहले मार्च 2025 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई की थी। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स और प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट 1960 का पालन करते हुए आवारा कुत्तों की सुरक्षा की जाए। हाई कोर्ट ने कहा था कि आवारा कुत्तों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन आम लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा, ताकि सड़कों पर कुत्तों के हमले से उनकी आवाजाही प्रभावित न हो।

'कुत्तों के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करें'

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में आवारा कुत्तों के हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें लोगों की जान गई और पैदल चलने वालों को गंभीर असुविधा हुई। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे याचिकाकर्ता और आम लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लें और आवारा कुत्तों की सुरक्षा के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाएं।

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