चेन्नई: तमिलनाडु के नीलगिरी और कोयंबटूर जिलों में शुक्रवार रात हुई भारी बारिश ने भारी तबाही मचाई। कई जगह पहाड़ों से मिट्टी, बड़े पत्थर और पेड़ गिरने से भूस्खलन हुआ। इस हादसे में सरकारी बस के ड्राइवर की मौत हो गई, जबकि कंडक्टर घायल हो गया। बारलियार गांव में एक घर भी बह गया। कूनूर-मेट्टुपालयम नेशनल हाईवे पर 10 से ज्यादा जगह भूस्खलन होने से यातायात ठप हो गया। प्रशासन ने लोगों से प्रभावित सड़कों पर गैर-जरूरी यात्रा नहीं करने की अपील की है।
कूनूर-मेट्टुपालयम हाईवे पर कई जगह भूस्खलन
शुक्रवार रात लगातार हुई बारिश के कारण हाईवे के कई हिस्सों में मिट्टी और पत्थर सड़क पर आ गिरे। कई जगह पेड़ भी उखड़कर रास्ते पर गिर गए, जिससे यातायात पूरी तरह रुक गया। आपदा राहत दल, दमकल और बचावकर्मी तथा हाईवे विभाग के अधिकारी सड़क से मलबा हटाने में जुटे हैं। उनका प्रयास सड़क संपर्क बहाल करना और रास्तों को सुरक्षित बनाना है।
हादसे में बस ड्राइवर की मौत, कंडक्टर घायल
भारी बारिश के बाद बारलियार के पास मेट्टुपालयम-ऊटी सड़क पर भूस्खलन की चपेट में सरकारी बस आ गई। इस हादसे में बस ड्राइवर जनकराज की मौत हो गई। कंडक्टर केशवन लंबे बचाव अभियान के बाद घायल अवस्था में निकाले गए। उन्हें इलाज के लिए मेट्टुपालयम सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे के वक्त बस में कोई यात्री सवार नहीं था, जिससे बड़ी जनहानि टल गई।
मुर्गियों से भरा वाहन खाई में गिरा, ड्राइवर सुरक्षित
भूस्खलन के दौरान मुर्गियां ले जा रहा एक मालवाहक वाहन भी इसकी चपेट में आ गया। पास में खड़ा यह वाहन मलबे के साथ खाई में जा गिरा, लेकिन उसका ड्राइवर सुरक्षित बच गया। बारलियार गांव में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण एक घर पूरी तरह बह गया। घर में रहने वाले लोग सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे, लेकिन उनका सामान और वर्षों की मेहनत से जुटाई गई जमा-पूंजी बर्बाद हो गई। पीड़ित परिवार ने बताया कि उनका घर, संपत्ति, पैसा और दोपहिया वाहन या तो बह गए या मिट्टी में दब गए। उन्होंने जिला प्रशासन से मदद और उचित मुआवजा देने की अपील की है।
कलेक्टर ने किया प्रभावित जगहों का दौरा
नीलगिरी की जिला कलेक्टर लक्ष्मी भव्या तन्नेरू और पुलिस अधीक्षक बृंदा ने भूस्खलन प्रभावित जगहों का दौरा किया। कलेक्टर ने बताया कि शुक्रवार शाम भारी बारिश के कारण जिले के कई हिस्सों, खासकर कूनूर-मेट्टुपालयम हाईवे पर भूस्खलन हुआ। शनिवार सुबह से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया। उन्होंने लोगों से अपील की कि आपात स्थिति को छोड़कर प्रभावित सड़कों पर यात्रा न करें, ताकि किसी और हादसे को रोका जा सके।
सड़कें कब खुलेंगी? सुरक्षा जांच के बाद होगा फैसला
कलेक्टर ने कहा कि सड़क से मलबा हटाने के बाद उसकी मजबूती और सुरक्षा की जांच की जाएगी। हाईवे विभाग से मंजूरी मिलने के बाद ही नियमित यातायात शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सड़कें सुरक्षित होने पर प्रशासन लोगों को इसकी जानकारी देगा। कलेक्टर ने कहा कि सभी मलबे को हटाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने तक लोगों को प्रभावित रास्तों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अधिकारियों ने लोगों से प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने को कहा है।
फंसे यात्रियों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया
भूस्खलन के कारण बसों और दूसरे वाहनों में फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकालकर कूनूर इलाके के राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। वहां उनके लिए भोजन और दूसरी जरूरी सुविधाओं का इंतजाम किया जा रहा है। प्रशासन ने प्रभावित लोगों की मदद के लिए कूनूर के कुछ सरकारी स्कूल भी खोल दिए हैं। इन जगहों पर लोगों की सहायता के लिए अधिकारियों को तैनात किया गया है, ताकि मौसम में सुधार होने तक उन्हें जरूरी मदद मिल सके।
आपात मदद के लिए 1077 नंबर जारी
जिला प्रशासन ने लोगों की सहायता के लिए जिले के अलग-अलग कार्यालयों के संपर्क नंबरों के साथ सार्वजनिक सूचना जारी की है। किसी भी आपात स्थिति में लोग 1077 हेल्पलाइन पर फोन कर मदद और जानकारी ले सकते हैं। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। बचाव दल और संबंधित विभाग सड़क से मलबा हटाने तथा यातायात बहाल करने में जुटे हैं। बता दें कि पिछले महीने केरल में भी भारी बारिश की वजह से हुए भूस्खलन में 5 लोगों की मौत हो गई थी। (ANI से इनपुट्स के साथ)
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