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तिरुपति बालाजी मंदिर में बनी आधुनिक लैब, अब घी की जांच के बाद ही बनेगा प्रसाद

तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद में मिलावट की खबर सामने आने पर जमकर बवाल हुआ था। अब ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मंदिर में ही आधुनिक लैब बनाई गई है। इस लैब में घी की जांच होगी।

Chandrababu naidu- India TV Hindi
Image Source : X/CHANDRABABUNAIDU लैब की बारीकियां समझते सीएम नायडू

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने तिरुमला पहाड़ी पर एक आधुनिक लैब का उद्घाटन किया है। यह लैब मंदिर परिसर का हिस्सा है और मंदिर में बनने वाले प्रसाद के घी की जांच करेगी। तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल किए जाने वाले घी में भारी मिलावट के आरोप लगे थे। इसके बाद जमकर बवाल हुआ था। अब ऐसी स्थिति से बचने के लिए यह स्थायी समाधान निकाला गया है। मुख्यमंत्री नायडू ने आधुनिक जल और खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। मुख्य रूप से यह प्रयोगशाला उन कच्चे माल की जांच करेगी, जिसमें घी भी शामिल है, जिनका उपयोग श्रीवारी प्रसादम्, अन्नप्रसादम तैयार करने में किया जाता है, साथ ही तैयार उत्पादों की भी जांच करेगी।

तिरुमला में टीटीडी की जल और खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला, विभिन्न स्रोतों से नमूने लेकर तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित जल और भोजन सुनिश्चित करती है। प्रयोगशाला के अपने दौरे के दौरान, उन्होंने वहां स्थापित 50 से अधिक आधुनिक उपकरणों का निरीक्षण किया। इस दौरान, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक पांडा और केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान के निदेशक गिरिधर ने उन्हें इन उपकरणों के कामकाज और तकनीकी क्षमताओं के बारे में जानकारी दी।

हर महीने 1000 से ज्यादा सैंपल की जांच संभव

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की जल और खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला, भक्तों को सुरक्षित पेयजल और स्वच्छ भोजन की आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। यह सुविधा नियमित रूप से कई स्रोतों से नमूने एकत्र करेगी है और उनकी गहन जांच करेगी, जिसमें श्रीवारी प्रसादम् और अन्न प्रसादम् तैयार करने में उपयोग होने वाले सैंपल भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रयोगशाला हर महीने 1,000 से 1,500 नमूनों का विश्लेषण करने में सक्षम है।

25 करोड़ की लागत से बनी लैब

इस प्रयोगशाला में एक ही छत के नीचे तीन अलग-अलग विभाग एकीकृत किए गए हैं। विश्लेषणात्मक (Analytical), आणविक (Molecular) और सूक्ष्मजीव विज्ञान (Microbiology)। इस प्रयोगशाला का निर्माण 12,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में किया गया है, जिस पर लगभग ₹25 करोड़ की लागत आई है।

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