नई दिल्लीः सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) की नियुक्ति पर वंतारा ने बयान जारी कर कहा कि हम पारदर्शिता और कानून के पूर्ण अनुपालन के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अत्यंत सम्मानपूर्वक स्वागत करते हैं। हमारा मिशन और ध्यान पशुओं के बचाव, पुनर्वास और देखभाल पर केंद्रित रहेगा। हम विशेष जांच दल को पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे और अपने सभी प्रयासों के केंद्र में पशुओं के कल्याण को रखते हुए, ईमानदारी से अपना काम जारी रखेंगे। हम अनुरोध करते हैं कि इस प्रक्रिया को बिना किसी अटकलबाज़ी के और हमारे द्वारा सेवा प्रदान किए जाने वाले पशुओं के सर्वोत्तम हित में होने दिया जाए।
एसआईटी जांच में सहयोग करेगा वंतारा
एसआईटी गठित होने के बाद वंतारा जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर ने मंगलवार को कहा कि संगठन सहयोग करेगा और जानवरों को बचाने और पुनर्वास करना जारी रखेगा। वंतारा ने कहा कि संगठन कानून का पालन करेगा।
याचिका में जांच की मांग की गई थी
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में कोल्हापुर से मंदिर की हथिनी ‘महादेवी’ को जामनगर के वंतारा अभयारण्य में राधे कृष्ण मंदिर हाथी कल्याण ट्रस्ट को स्थानांतरित किए जाने को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि गुजरात के जामनगर में वनतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर की जांच की गई। इसकी जांच के लिए कोर्ट ने सदस्यीय एसआईटी बनाई हुई है।
15 सितंबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
बता दें कि सोमवार को शीर्ष अदालत ने गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा प्राणी बचाव एवं पुनर्वास केंद्र में जानवरों के अवैध अधिग्रहण और उनके साथ दुर्व्यवहार के आरोपों की तथ्य-खोजी जांच करने के लिए न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने विशेष जांच दल को अपनी जांच पूरी करके 12 सितंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की गई है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि चार सदस्यीय विशेष जांच दल वन्यजीव संरक्षण कानूनों के अनुपालन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों, पशु कल्याण मानकों और पर्यावरण संबंधी चिंताओं जैसे मुद्दों की भी जांच करेगा और रिपोर्ट देगा।
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