चेन्नई: द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि के 93वें जन्मदिन पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटीं और कल्याण सहायता तथा रक्तदान जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया। राज्य के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके करुणानिधि ने इस अवसर पर यहां द्रमुक के संस्थापक नेता सी एन अन्नादुरई और तर्कवादी नेता ईवी रामासामी पेरियार के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।
करुणानिधि ने सीआईटी कॉलोनी स्थित अपने आवास में एक पौधा लगाया और बाद में अपने बेटे एवं द्रमुक के कोषाध्यक्ष एमके स्टालिन सहित अपने परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में केक भी काटा। इस अवसर पर उनकी बेटी एवं राज्यसभा सांसद कनिमोझी ने उन्हें बधाई दी। पार्टी के दुरईमुरूगन और टी आर बालू जैसे नेता उनके आवास पर गये और उन्हें बधाई दी।
करुणानिधि का फिल्म पटकथा लेखक से राजेनता तक का सफर-
करुणानिधि का जन्म 3 जून 1924 तमिलनाडु के नागपट्टिनम के तिरुक्कुभलइ में हुआ। ईसाई समुदाय से संबंध रखने वाले करुणानिधि मूलत: एक फिल्म पटकथा लेखक रहे, लेकिन आज वे दक्षिण भारत के बड़े सामाजिक प्रभाव वाले नेता बन गए हैं। उन्होंने तमिल फिल्म उद्योग में एक पटकथा (कहानी) लेखक के रूप में कॅरियर शुरू किया, लेकिन जल्द ही व्यवहारिक समझ, कुशलवक्तृत्व कला के बूते वे राजनेता बन गए। फिल्मों के ज़रिए दिए गए सामाजिक संदेश की वजह से पार्टी का सामाजिक आधार मज़बूत हुआ।
14 साल की उम्र से ही रास आने लगी थी राजनीति
करुणानिधि का राजनीति की ओर रुझान तो बचपन से ही था लेकिन राजनीति में प्रवेश स्टिस पार्टी के अलगिरिस्वामी के एक भाषण से प्रेरित होकर हुआ। 14 साल की उम्र में ही उन्हें राजनीति रास आने लग गई थी। उन्होंने अपने इलाके के स्थानीय युवाओं के लिए एक संगठन की स्थापना की और बाद में मनावर नेसन नामक एक हस्तलिखित अखबार भी चलाया। बाद में उन्होंने तमिलनाडु तमिल मनावर मंद्रम नामक एक छात्र संगठन की स्थापना की जो द्रविड़ आन्दोलन का पहला छात्र विंग था।
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