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93 के हुए करुणानिधि, जानिए एक पटकथा लेखक से राजनेता तक का सफर

चेन्नई: द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि के 93वें जन्मदिन पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटीं और कल्याण सहायता तथा रक्तदान जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया। राज्य के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके करुणानिधि ने इस अवसर

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ऐसे मिली सत्‍ता, बने DMK का चेहरा

तमिलनाडु की सियासत में करुणानिधि ने प्रवेश सन् 1957 में किया, जब वे तिरुचिरापल्ली जिले के कुलिथालाई विधानसभा से जीते। इसके बाद वे 1961 में डीएमके कोषाध्यक्ष बने और 1962 में राज्य विधानसभा में विपक्ष के उपनेता बने और 1967 में जब डीएमके सत्ता में आई, तब वे सार्वजनिक कार्य मंत्री बने। उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब 1969 में डीएमके के संस्‍थापक अन्नादुरई की मौत हो गई और वे अन्‍नादुरई के बाद न केवल डीएमके का चेहरा बने, बल्‍कि पहली बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने और राष्‍ट्रीय स्‍तर पर उनकी पहचान बनी।

5 बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं करुणानिधि

करूणानिधि तमिलनाडु के पांच बार 1969-71, 1971-76, 1989-91, 1996-2001 और 2006-11 तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं। हाल में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में द्रमुक पराजित हो गयी है लेकिन यह 89 सीट जीतकर एक सशक्त विपक्ष के रूप में उभरकर सामने आयी है।

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