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Budget 2018 Highlights: सेंसेक्स में मचा हाहाकार, 450 अंक की आई गिरावट

50 करोड़ लोगों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपए का स्‍वास्‍थ्‍य बीमा सरकार उपलब्‍ध कराएगी जिसमें 5 लाख रुपए प्रति परिवार प्रति वर्ष दिया जाएगा बीमा कवर। राष्‍ट्रीय हेल्‍थ प्रोटेक्‍शन स्‍कीम लॉन्‍च की गई, 10 करोड़ गरीब परिवार होंगे कवर।

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Budget 2018 Highlights: 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का है लक्ष्‍य: जेटली

नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली मोदी सरकार का आखिरी फुल बजट पेश करते हुए 50 करोड़ लोगों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपए का स्‍वास्‍थ्‍य बीमा देने का ऐलान किया जिसमें 5 लाख रुपए प्रति परिवार प्रति वर्ष दिया जाएगा बीमा कवर। राष्‍ट्रीय हेल्‍थ प्रोटेक्‍शन स्‍कीम लॉन्‍च की गई, 10 करोड़ गरीब परिवार होंगे कवर। मोदी सरकार का ये बजट आखिरी फुल बजट भले ही है लेकिन इसे पीएम का ड्रीम बजट माना जा रहा है इसलिए इस बजट से देश के हर वर्ग को उम्मीदें हैं। सवाल है कि जेटली अपने इस बजट में किस-किस की उम्मीदें पूरी करेंगे? देश में जीएसटी लागू होने के बाद मोदी सरकार का ये पहला आम बजट है। इसके साथ ही 2019 के आम चुनाव से पहले भी मोदी सरकार का ये आखिरी फुल बजट है। ऐसे में इस बजट से लोगों को काफी उम्मीदें हैं।

​​देखिए बजट पर वित्‍त मंत्री अरुण जेटली के साथ रजत शर्मा बातचीत: इंडिया टीवी संवाद

Budget 2018 Highlights

  • वरिष्‍ठ नागरिकों और दिव्‍यांगों को मिलेगा लाभ
  • 40 हजार रुपए स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन की हुई घोषणा
  • 250 करोड़ रुपए से अधिक के टर्नओवर वाली कंपनियों को देना होगा 30 प्रतिशत टैक्‍स।
  • 250 करोड़ रुपए सालाना टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्‍स 25 प्रतिशत किया गया।
  • इनकम टैक्‍स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया
  • किसानों के लिए संपदा योजना को मिलेगा बढ़ावा
  • पोस्‍ट हार्वेस्‍ट टैक्‍स प्रोत्‍साहन देने का प्रस्‍ताव
  • 19.25 लाख नए करदाता 2016-17 के दौरान जोड़े गए।
  • 15 जनवरी 2018 तक डायरेक्‍ट टैक्‍ स में 18.7 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई ।
  • 2017-18 में डायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन में हुआ 12.6 प्रतिशत की वृद्धि
  • राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.3 प्रतिशत रहने की उम्‍मीद
  • महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती समारोह के लिए 150 करोड़ रुपए का प्रावधान
  • प्रत्‍येक पांच साल में होगा वेतन में संशोधन

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  • सांसदों के वेतन के लिए बनेगा नया कानून
  • राष्‍ट्रपति, उपराष्‍ट्रपति और राज्‍यों के राज्‍यपाल का वेतन बढ़ाने की हुई घोष्‍ाणा
  • सरकार ने बैंक पुन:पूंजीकरण कार्यक्रम की शुरुआत की।
  • ईटीएफ भारत-22 से सरकार ने 14500 करोड़ रुपए जुटाए
  • 80 हजार करोड़ रुपए होगा 2018-19 के लिए सरकार का विनिवेश लक्ष्‍य: जेटली
  • उद्योगों के लिए अलग से विशिष्‍ट पहचान संख्‍या लाने की योजना
  • सरकार उद्योग अनुकूल रक्षा उत्‍पादन नीति 2018 पेश करेगी
  • सभी टोल प्‍लाजा पर जल्‍द शुरू होगी ई-भुगतान की सुविधा

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  • 5जी टेक्‍नोलॉजी के लिए चेन्‍नई में खोला जाएगा स्‍वदेशी प्रयोगशाला
  • सरकार क्रिप्‍टोकरेंसी को लीगल टेंडर नहीं मानती : जेटली
  • डिजिटल इंडिया के लिए 3073 करोड़ रुपए का किया गया प्रावधान
  • कृत्रिम आसूचना क्षेत्र के लिए राष्‍ट्रीय मिशन किया जाएगा शुरू
  • पर्यटन क्षेत्र में रोपवे को बढ़ावा दिया और आगे भी ये जारी रहेगा
  • राज्‍यों से विचार कर भारतीय स्‍टांप अधिनियम में किया जाएगा सुधार
  • 600 प्रमुख स्‍टेशनों को पुन: विकसित करने पर काम हुआ शुरू।

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क्या इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़ेगी? क्या आम जरूरत की चीजें सस्ती होंगी? क्या किसानों को कर्ज माफी मिलेगी और सबसे बडा़ सवाल क्या पेट्रोल-डीजल की कीमत पर लगाम लगाने की घोषणा होगी? ये ऐसे सवाल हैं जिनका सामना टीम जेटली ने 2018 के बजट बनाते समय किया होगा। अब आज इन सवालों के जवाब पाने का वक्त है। सुबह ग्यारह बजे वित्त मंत्री संसद में अपना बजट पेश करेंगे लेकिन बजट में क्या होगा इसे लेकर खुद प्रधानमंत्री संकेत दे चुके हैं। पीएम ने कहा है कि इस बार का बजट सबकी उम्मीदों को पूरा करने वाला होगा।

बजट से 10 बड़ी उम्मीदें
1. देश में रोजगार के ज्यादा मौके के लिए रोजगार नीति लाई जाए
2. सस्ते इलाज और सस्ती दवाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
3. पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम पर अंकुश लगाया जाए
4. आयकर पर मिलने वाली छूट की सीमा 2.5 लाख से बढ़ाई जाए
5. होम लोन पर टैक्स छूट को बढ़ाया जाए, स्टांप ड्यूटी में राहत मिले
6. रेल टिकट सस्ता हो, सुरक्षित सफर की गारंटी मिले
7. शिक्षा क्षेत्र की हालत सुधारने के लिए बजट आवंटन बढ़े
8. किसानों की आय बढ़ाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में इजाफा हो
9.  बिजली सस्ती हो, ताकि बिजली पर होने वाला खर्च कम हो सके
10. GST टैक्स स्लैब को कम किया जाए,छोटे कारोबारियों को राहत मिले

पीएम के इस बयान से साफ है कि इस बार के बजट में हर वर्ग को साधने की कोशिश होगी लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद इस बार के बजट में कुछ बातें हैं जो नहीं होंगी। जीएसटी लागू होने के बाद अब इनडायरेक्ट टैक्स में कोई बदलाव बजट के जरिए नहीं होगा। यानी बजट के जरिए आम उपभोक्ताओं को कंज्यूमर आइटम्स पर कोई खास फायदा नहीं मिलेगा। अब ये काम वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल करती है जो नियमित रूप से बैठक कर एक मिनी बजट जैसा प्रावधान करती है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को संसद में जो आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया था उसके मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान जीडीपी ग्रोथ रेट 7 से 7.5 फीसदी के बीच रह सकती है जबकि इस वित्त वर्ष के दौरान ग्रोथ रेट 6.75 फीसदी ही रहने का अनुमान है। यानी सरकार के सामने बजट में सख्त फैसले लेने की मजबूरी भी होगी।

इनकम टैक्स का क्या होगा?

मजबूरी इसलिए क्योंकि नोटबंदी और जीएसटी के बाद इकोनॉमी में गिरावट देखी गई थी। सरकार 2018-19 के वित्तीय घाटे के लक्ष्य को बढ़ा सकती है, क्योंकि आम चुनाव से पहले लोक लुभावन योजनाओं पर खर्च बढ़ सकता है। यह आम बजट इसलिए भी अहम है क्योंकि इस साल 8 राज्यों में चुनाव है। कर्नाटक, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय के अलावा इसी साल राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में भी चुनाव हैं। सरकार इन राज्यों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का एलान कर सकती है।

यानी अरुण जेटली के लिए शायद ये सबसे चुनौतीपुर्ण बजट साबित हो सकता है। जहां इस बजट में उन्हें राजकोषीय लक्ष्यों को साधने की चुनौती होगी तो वहीं कृषि क्षेत्र के संकट, रोजगार पैदा करने और आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देने की चुनौतियां भी होंगी।

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