क्या आप जानते हैं नरेंद्र मोदी कभी साधु बनना चाहते थे'
क्या आप जानते हैं नरेंद्र मोदी कभी साधु बनना चाहते थे'
India TV News Desk
Published : Sep 17, 2015 07:26 am IST, Updated : Sep 17, 2015 11:59 am IST
नई दिल्ली: नरेन्द्र मोदी बचपन में साधु-संतों से प्रभावित हुए और संन्यासी बनने के लिए स्कूल की पढ़ाई के बाद घर से भाग गए थे। इस दौरान मोदी पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम सहित कई
नरेंद्र मोदी बचपन से ही आरएसएस से जुड़े हुए थे। 1958 में दीपावली के दिन गुजरात आरएसएस के पहले प्रांत प्रचारक लक्ष्मण राव इनामदार उर्फ वकील साहब ने नरेंद्र मोदी को बाल स्वयंसेवक की शपथ दिलवाई थी।
नरेन्द्र मोदी संघ में कुर्ते की बांह छोटी करवा लीं, ताकि वह ज्यादा खराब न हो, जो वर्तमान में मोदी ब्रांड का कुर्ता बन गया है और देशभर में मशहूर है।
जब नरेन्द्र मोदी प्रचारक थे तो उन्हें स्कूटर चलाना नहीं आता था। शकरसिंह वाघेला उन्हें अपनी स्कूटर पर घुमाया करते थे।
वे 1975 में इमरजेंसी के दौरान सरदार का रूप धरकर ढाई सालों तक पुलिस को छकाते रहे।
नरेंद्र मोदी ने अमेरिका में मैनेजमेंट और पब्लिक रिलेशन से संबंधित तीन महीने का कोर्स किया है।
नरेन्द्र मोदी स्वभाव से आशावादी व्यक्ति हैं। एक भाषण के दौरान उन्होंने कहा था कि लोगों को आधा गिलास पानी से भरा नजर आता है, लेकिन मुझे आधा गिलास पानी और आधा हवा से भरा नजर आता है।
नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए कई देशों की यात्राएं की जिनमें चीन प्रमुख है। उन्होंने चीन के विकास को बहुत करीब से देखा।
गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने वाइब्रेंट गुजरात समिट आयोजित कर देश और विदेश के उद्योगपतियों को निवेश के लिए आकर्षित किया।
नरेंद्र मोदी पतंगबाजी के शौकीन हैं। सियासत के आसमान की तरह वे पतंगबाजी में भी अच्छे पतंगबाजों की कन्नियां काटते हैं।
गुजरात में मुस्लिम कट्टरपंथी नरेन्द्र मोदी के विरोधी थे, इनमें से एक जफ्फर सरेशवाला थे जो इनके मुख्यमंत्री बनने के बाद लंदन चले गए और इनके खिलाफ प्रचार-प्रसार किया। बाद में जब वे मोदी से मिले तो इनके करीबी बन गए।