1. Hindi News
  2. भारत
  3. राजनीति
  4. तीन तलाक को समान नागरिक संहिता से जोड़कर ना देखा जाए: BMMA

तीन तलाक को समान नागरिक संहिता से जोड़कर ना देखा जाए: BMMA

उच्चतम न्यायालय में 11 मई से तीन तलाक के मामले पर सुनवाई आरंभ होने से पहले भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (BMMA) ने आज इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राय का समर्थन करते हुए कहा कि......

three divorces should not be linked to the same civil code- India TV Hindi
three divorces should not be linked to the same civil code

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय में 11 मई से तीन तलाक के मामले पर सुनवाई आरंभ होने से पहले भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (BMMA) ने आज इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राय का समर्थन करते हुए कहा कि तीन तलाक महिला अधिकार से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। मुस्लिम समाज में तीन तलाक की प्रथा खत्म करने के लिए मुहिम चला रहे इस संगठन ने तीन तलाक के मामले को समान नागरिक संहिता के साथ जोड़ने के प्रयासों की आलोचना करते हुए कहा कि ये दोनों मामले अलग हैं क्योंकि समान नागरिक संहिता का संबंध किसी एक समुदाय विशेष से नहीं है। (कपिल मिश्रा का बड़ा आरोप, सत्येंद्र जैन ने केजरीवाल को दिए थे 2 करोड़ रुपए)

बीएमएमए की सह-संस्थापक नूरजहां सफिया नियाज ने भाषा से कहा, तीन तलाक का मामला मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। राजनीतिकरण करने से तीन तलाक पर चल रही मुहिम अपने रास्ते से भटक जाएगी। गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि तीन तलाक पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और इस मामले को हल करने के लिए मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवी खुद आगे आएं।

सफिया नियाज ने कहा, कुछ लोग तीन तलाक के मामले को समान नागरिक संहिता से भी जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। हम पहले से कहते आ रहे हैं कि समान नागरिक संहिता किसी एक समुदाय से जुड़ा मुद्दा नहीं है। इस पर आगे बढ़ने के लिए हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, पारसी और दूसरे सभी समुदाय के लोगों को विश्वास में लेना होगा। तीन तलाक मुस्लिम समाज का मामला है और इसलिए इसको एक अलग मुद्दे के तौर पर देखने की जरूरत है। तीन तलाक मुद्दे पर आगे की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर सफिया नियाज ने कहा, आगामी 11 मई से उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हो रही है। फिलहाल हम उस पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि देश की सबसे बड़ी अदालत से मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ मिलेगा।

तीन तलाक के पक्ष में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड केे करोड़ों लोगों का हस्ताक्षर लेने के दावे के बारे में उन्होंने कहा, हस्ताक्षर अभियान उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पता चला है कि इन लोगों ने बहुत सारे बच्चों के भी हस्ताक्षर ले लिए हैं। सफिया नियाज ने कहा, हाल के दिनों में यह देखा गया है कि इस मामले पर मौलानाओं के रूख में नरमी आई है। इनके झुकने की वजह यह है कि अब मुस्लिम महिलाएं खड़ी हो गई हैं। मुस्लिम महिलाओं को उनका वाजिब हक मिलने से कोई रोक नहीं सकता।

Latest India News