पटना: बिहार में वर्ष 2017 बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बेहद नाटकीय रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू, लालू प्रसाद यादव की राजद और कांग्रेस को मिलाकर बने महागठबंधन का साथ छोड़ भाजपा नीत राजग का दामन फिर से थाम लिया।
लालू प्रसाद के लिए जाता हुआ साल बहुत खराब साबित हुआ जहां राज्य सरकार से उनकी पार्टी को हटना पड़ा और चारा घोटाले में जेल जाना पड़ा। रांची की एक विशेष अदालत ने 23 दिसंबर को लालू और 15 अन्य को 21 साल पुराने चारा घोटाले में दोषी ठहराया था। इस मामले में सजा तीन जनवरी को सुनाई जाएगी। 69 साल के राजद नेता फिलहाल रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं।
आइए एक नजर डालते हैं बिहार के नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम पर-
जहरीली शराब- राज्य में शराबबंदी के जमीनी क्रियान्वयन पर जहरीली शराब के कारण होने वाली मौत की घटनाओं ने सवालिया निशान लगाए। जहरीली शराब के कारण मौत की घटना रोहतास और वैशाली जिलों में हुई। समस्तीपुर में शराब तस्करों ने एक पुलिसकर्मी की हत्या कर दी। इसके अलावा राज्यभर से बड़े पैमाने पर शराब की बरामदगी हुई।
बिहार में बाढ़ ने मचाई तबाही- इस वर्ष प्राकृतिक आपदा ने भी बिहार में भारी तबाही मचाई। उत्तरी बिहार के 19 जिलों में बाढ़ के कारण करीब दस लाख लोग बेघर हो गए और 500 से अधिक लोगों की जान चली गई।
सृजन घोटाला- नई सरकार के गठन के कुछ ही समय बाद सृजन घोटाला सामने आया जो राजकोष से एक गैर सरकारी संगठन को सैकड़ों करोड़ रूपये धोखे से स्थानांतरित करने से जुड़ा था। इस मामले में राज्य सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दिए।
नीतीश ने छोड़ा महागठबंधन का साथ- बेहद नाटकीय घटनाक्रम में नीतीश कुमार ने महागठबंधन का साथ छोड़ दिया। नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के विरोध में उन्होंने चार वर्ष पहले ही भाजपा का 17 वर्ष का साथ छोड़ दिया था और महागठबंधन बनाया था।
मोदी-नीतीश के बीच तल्ख संबंधों में गर्मजोशी- नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के बीच तल्ख संबंधों में गर्मजोशी का संकेत जनवरी में प्रकाश पर्व के मौके पर मिला। गुरू गोविंद सिंह की 350वी जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में मोदी और कुमार ने मंच साझा किया और एकदूसरे की तारीफों के पुल बांधे। नोटबंदी के मोदी के फैसले के समर्थन में खुलकर सामने आकर कुमार ने अपने गठबंधन सहयोगियों को नाराज कर दिया था। महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है इसके स्पष्ट संकेत तब मिले जब कुमार ने राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद को समर्थन देने का फैसला किया।
sushil modi and nitish kumar