सीजेपी नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को सात दिनों की न्यायिक हिरासत के बाद बुधवार को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। सीजेपी नेताओं ने नई दिल्ली में एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में शपथ ली कि वे जंतर-मंतर पर किसी भी तरह का प्रोटेस्ट नहीं बुलाएंगे, क्योंकि यह अब प्रोटेस्ट साइट के रूप में अधिसूचित नहीं है। मजिस्ट्रेट ने सौरव दास और आशुतोष को 50 - 50 हजार रुपये के पर्सनल बॉन्ड और श्योरिटी बॉन्ड भरने का निर्देश देकर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया और कहा कि उनके खिलाफ जांच जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।
अभिजीत दिपके का पोस्ट
दोनों नेताओं की रिहाई के बाद अभिजीत दिपके ने पोस्ट किया-सौरव और आशु न सिर्फ मुझसे बेहतर बल्कि बहुत बड़े नेता हैं। मेरे नेताओं, आपके आदेशों का पालन करने में खुशी हो रही है। जान हाजिर है!लेकिन इसके बाद मेरे बिना गार्डन में कोई अकेला नहीं घूमेगा!!!
सौरव और आशुतोष ने कोर्ट से क्या वादा किया
- मैं यह वचन देता हूं और वादा करता हूं कि मैं शांति भंग नहीं करूंगा। मैं यह भी स्पष्ट करता हूं कि मुझे न्यायपालिका और उसकी सभी प्रणालियों पर पूरा भरोसा है, जिसमें यह SEM अदालत भी शामिल है।
- हम शांति, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक अमन-चैन बनाए रखने के अपने वादे को दोहराते हैं। जब तक कानून के मुताबिक जंतर-मंतर को फिर से प्रोटेस्ट साइट के रूप में अधिसूचित नहीं किया जाता, तब तक हम वहां कोई प्रोटेस्ट नहीं बुलाएंगे।
- हम यह भी दोहराते हैं कि अगर कोई प्रोटेस्ट किया जाता है, तो वह पूरी तरह से संविधान के दायरे में रहकर ही किया जाएगा।
सौरव और रांका को क्यों भेजा गया जेल
सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका14 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में थे। उन्होंने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर के बंद गेट को फांदकर इसे प्रोटेस्ट के लिए तय जगह की लिस्ट से हटाए जाने के विरोध में राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। अभियोजन पक्ष ने कहा कि इस हरकत से उस पीस बॉन्ड का उल्लंघन हुआ है, जिस पर दोनों ने 10 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद साइन किए थे। उन्होंने चुनावी धांधली के खिलाफ प्रोटेस्ट बुलाया था।
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