असम और बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद मोदी सरकार एक बार फिर परिसीमन बिल को संसद में पास कराने में जुट गई है। गृह मंत्रालय नया बिल पेश करने की तैयारी कर रहा है। सरकार चाहती है कि 2029 चुनाव के पहले परिसीमन बिल और 'एक देश एक चुनाव बिल' को संसद की मंजूरी मिल जाए।आपको बता दें कि पिछली बार जब सरकार पांच राज्यों में चुनाव से ठीक पहले परिसीमन बिल को संसद में लाई थी तब उसे लोकसभा में दो तिहाई बहुमत नहीं मिला था और ये बिल संसद में गिर गया था।
कैसे पास हो सकता है बिल?
दरअसल, हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद कई राज्यों में समीकरण बदल चुके हैं। तमिनाडु के नतीजों के बाद कांग्रेस और DMK का गठबंधन टूट चुका है। बताया जा रहा है कि बिल पास कराने के लिए DMK से संपर्क किया गया है। साथ ही टीएमसी में भी चल रही हलचल पर सरकार की बारीक नजर है। अगर TMC में टूट होती है और बड़ी संख्या में सांसद ममता की पार्टी से अलग होते हैं तो सरकार के लिए इस बार डिलिमिटेशन बिल संसद में पास कराना आसान हो जाएगा।
बिल पेश हुआ था तो संसद में क्या हुआ?
दरअसल, पिछली बार जब लोकसभा में परिसीमन बिल को पेश किया गया था तो इस पास कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत यानी कि 362 वोटों की जरूरत थी। हालांकि, बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े थे तो वहीं, बिल को खिलाफ 230 सांसदों ने वोट किया था। इस कारण सरकार ये बिल पास नहीं करवा सकी थी।
कांग्रेस ने क्या कहा?
केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन बिल को दोबारा से पेश किए जाने की अटकलों के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा- "सरकार ने हमसे संपर्क नहीं किया है, और कोई औपचारिक परामर्श प्रक्रिया भी नहीं चल रही है... लोग इस पूरे मुद्दे पर एक गंभीर चर्चा चाहते हैं कि लोकसभा में हमारी जनता का उचित प्रतिनिधित्व कैसे किया जाए, ताकि जनसंख्या के साथ-साथ राज्य के हितों का भी ख्याल रखा जा सके।"
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