तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई पार्टी के शीर्ष नेताओं से मिलने के लिए दिल्ली पहुचे हैं। चर्चा ये भी है कि वह भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे सकते हैं। संभावना है कि वह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर उन्हें अपने फैसले से अवगत कराएंगे। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चा के अनुसार, अन्नामलाई स्वतंत्र रूप से राजनीति में उतरने की योजना बना रहे हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की है।
नई पार्टी का कर सकते हैं ऐलान
इस घटनाक्रम के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने लोगों से इंतजार करने को कहा और बताया कि अगले कुछ दिनों में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। इस बीच, मदुरै और कोयंबटूर में पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें समर्थकों ने अन्नामलाई से तमिलनाडु को "बचाने" के लिए एक नया रूप धारण करने का आग्रह किया है। कई लोगों का मानना है कि वे 4 जून को अपने जन्मदिन पर कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं। माना जा रहा है कि वह अपनी नई पार्टी का ऐलान भी कर सकते हैं।
अन्नामलाई की नाराजगी की वजहें
1. भाजपा का AIADMK के साथ गठबंधन- अन्नामलाई लगातार भाजपा के AIADMK के साथ गठबंधन का विरोध करते रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में, भाजपा ने तमिलनाडु में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा, जबकि AIADMK एनडीए से बाहर रही। BJP ने 23 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 11.24 प्रतिशत वोट हासिल किए। हालांकि, वह राज्य में एक भी सीट जीतने में असफल रही, यहां तक कि कोयंबटूर निर्वाचन क्षेत्र में अन्नामलाई को भी हार का सामना करना पड़ा।
2. अन्नामलाई को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाना- अन्नामलाई ने 2021 से 2025 तक भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इस दौरान राज्य में पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता और प्रभाव के कारण वे एक जाना-पहचाना चेहरा बन गए। अप्रैल 2025 में, भाजपा ने AIADMK के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए कथित तौर पर नैनार नागेंद्रन को उनकी जगह अध्यक्ष बना दिया। खबरों के मुताबिक, AIADMK के महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी ने भाजपा के साथ गठबंधन वार्ता शुरू करने के लिए अन्नामलाई को हटाने को एक प्रमुख शर्त बना दिया था। सूत्रों ने बताया कि पलानीस्वामी, अन्नामलाई की AIADMK के खिलाफ पहले की गई टिप्पणियों और आलोचना से नाखुश थे, जिसके कारण दोनों पार्टियों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे।
3. 2026 विधानसभा चुनावों में अन्नामलाई की अनदेखी- साल 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अन्नामलाई नाराज दिखे। खबरों के अनुसार पार्टी के महत्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उन्हें दरकिनार किए जाने के कारण ऐसा हुआ। उनकी असंतुष्टि इतनी स्पष्ट थी कि उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया।
4. नीतिगत मतभेद- के. अन्नामलाई ने भाजपा की कुछ नीतियों पर भी आपत्ति जताई। उदाहरण के लिए, उन्होंने स्कूलों में तीन-भाषा नीति को लागू करने के केंद्र सरकार की टाइमिंग पर सवाल उठाया, जिससे यह संकेत मिलता है कि तमिलनाडु को प्रभावित करने वाले किसी भी मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त करने के लिए वे तत्पर हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से अधिसूचना रद्द करने का आग्रह किया था।
5. चुनावी रणनीति पर मतभेद- गठबंधन प्रबंधन, उम्मीदवार चयन और सीट बंटवारे की व्यवस्था को लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ अन्नामलाई के मतभेदों की खबरें भी सामने आई हैं।
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