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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला 19 जून को ममता बनर्जी गुट का पक्ष सुनेंगे, अभिषेक बनर्जी को बुलाया

अभिषेक बनर्जी शुक्रवार शाम को ओम बिरला से मुलाकात कर पार्टी का रुख स्पष्ट करेंगे। यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने NCPI में खुद का विलय कर लिया।

ओम बिरला और अभिषेक बनर्जी- India TV Hindi
Image Source : PTI ओम बिरला और अभिषेक बनर्जी

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने TMC नेता अभिषेक बनर्जी को पार्टी में विभाजन के मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए 19 जून को बैठक के लिए आमंत्रित किया है। तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि पार्टी को बुधवार शाम 5:00 बजे लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय से इस संबंध में ईमेल प्राप्त हुआ। 

अभिषेक बनर्जी शुक्रवार शाम बिरला से मुलाकात करेंगे। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब तृणमूल के 20 बागी सांसदों ने 'नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में विलय करने के बाद खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। स्पीकर ओम बिरला ने इस मामले में कोई निर्णय लेने से पहले दोनों पक्षों को सुनने का फैसला किया है।

अभिषेक बनर्जी ने लिखी थी चिट्ठी

अभिषेक बनर्जी ने 10 जून को लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर अलग गुट होने का दावा करने वाले किसी भी समूह को किसी प्रकार की मान्यता, दर्जा या सहूलियत प्रदान नहीं की जाए। बनर्जी ने पत्र में कहा था कि संविधान और दल-बदल विरोधी कानून किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर अलग समूह के गठन की अनुमति नहीं देते। पार्टी के सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने भी रविवार को बिरला के आवास पर जाकर यह पत्र उन्हें सौंपा था।

"पार्टी सर्वोपरि, गुट नहीं"

बनर्जी ने अपने पत्र में कहा था, "तृणमूल कांग्रेस को सदन में उसके विधिवत अधिकृत नेता और मुख्य सचेतक के माध्यम से प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र राजनीतिक दल के रूप में माना जाए और किसी भी कथित अलग समूह या गुट को किसी प्रकार की मान्यता, दर्जा या सहूलियत देने से इनकार किया जाए।"

उन्होंने महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट से जुड़े उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अब 'विभाजन' का बचाव करने का रास्ता नहीं बचा है और मौजूदा कानूनी व्यवस्था एक समूचे राजनीतिक दल को मान्यता देती है, न कि उसके भीतर प्रतिद्वंद्वी गुटों को। उन्होंने यह भी कहा था, "यदि इस प्रकार का कोई अनुरोध प्राप्त होता है तो उस पर कोई भी निर्णय लेने से पहले तृणमूल कांग्रेस को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।" संसदीय सूत्रों ने कहा कि बिरला इस मामले में कानून, नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप निर्णय लेंगे।

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