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झारखंड में छात्रों पर बल प्रयोग की राहुल गांधी ने की निंदा, जंतर-मंतर मामले पर केंद्र से पूछे सवाल

राहुल गांधी ने झारखंड में छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग को गलत बताया है और इसकी निंदा भी की है। इसके अलावा उन्होंने जंतर मंतर पर पैलेट गन चलाए जाने को लेकर केंद्र सरकार से सवाल पूछा।

राहुल गांधी ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस।- India TV Hindi
Image Source : X/INCINDIA राहुल गांधी ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस।

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस की। इस मौके पर राहुल गांधी ने कहा, "झारखंड के छात्रों के लिए मेरा संदेश साफ है। हम शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा की निंदा करते हैं, चाहे वह कहीं भी हो। हम इसकी निंदा करते हैं; हम इसके खिलाफ हैं; हम इसका समर्थन नहीं करते हैं। इस मामले में हमारा रुख बिल्कुल साफ है, हमारे मन में कोई उलझन नहीं है कि शांतिपूर्ण विरोध पर हिंसा के जरिए हमला करना गलत है। झारखंड सरकार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों की बात सुननी जारी रखनी चाहिए और उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान करना चाहिए।"

"कांग्रेस ने की तीन मांगें"

राहुल गांधी ने आगे कहा, "सवाल यह नहीं था कि अमित शाह संसद में आकर कुछ आम विषयों पर भाषण देंगे। सवाल हमेशा यह रहा है कि अमित शाह को यह साफ़ करना होगा कि दिल्ली में हमारे युवाओं पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया। पेलेट गन चलाई गईं, छात्रों को कील लगी लाठियों से पीटा गया। उन्हें साफ़-साफ़ बताना चाहिए। क्या उन्होंने इसका आदेश दिया था या नहीं? अगर उन्होंने आदेश दिया था, तो हमारे बच्चों पर गोली चलवाने के लिए वे दोषी हैं। और अगर उन्हें इस घटना के बारे में पता नहीं था, तो वे अयोग्य हैं। दोनों ही सूरतों में, उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। यही चर्चा का विषय था।" 

उन्होंने कहा, "दूसरी बात, प्रधानमंत्री जो हुआ है उसके लिए माफी मांगें। और तीसरी बात राम मंदिर में चोरी का मुद्दा था। प्रधानमंत्री के बहुत करीबी लोगों ने राम मंदिर में चोरी की है। ये तीन मुद्दे हैं। तो अब अमित शाह अचानक कह रहे हैं कि वे बोलने को तैयार हैं। हमें उनकी मनगढ़ंत बातों में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमें इसमें दिलचस्पी है कि क्या उन्होंने हमारे बच्चों पर गोली चलाने का आदेश दिया था या नहीं। सबसे पहले, उन्हें यह बात पूरी तरह साफ़ करनी चाहिए। उसके बाद ही किसी चर्चा का सवाल उठता है। यही स्थिति है। और विपक्ष यही मांग कर रहा है। हम पिछले 15 दिनों से यही मांग कर रहे हैं।"

राहुल गांधी ने कहा, "अमित शाह में संसद में आकर हमारे सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं है। पिछले 15 दिनों में उन्होंने यही दिखाया है। न तो नरेंद्र मोदी और न ही अमित शाह में इतनी हिम्मत है। किसी को उनकी राय में कोई दिलचस्पी नहीं है। हम बस यह जानना चाहते हैं कि फायरिंग का आदेश किसने दिया, और अगर उन्होंने आदेश नहीं दिया, तो MHA में किसने आदेश दिया? हम यह समझना चाहते हैं: क्या यह गलती है या अक्षमता?"

पीएम और गृहमंत्री से मांगा जवाब

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, "20 जुलाई को संसद का सत्र प्रारंभ होने के पहले दिन से ही विपक्ष ने सुदृढ़ता से अपनी मांगें रखी हैं। पहली मांग हमारी यही है कि केंद्रीय गृह मंत्री, दिल्ली पुलिस के द्वारा जो अत्याचार हुआ, पैलेट गन्स चली, आंसू गैस के गोले दागे गए, लाठीचार्ज हुआ, हम चाहते थे कि उस पर चर्चा हो और वे (अमित शाह) सदन में आएं। पेपर लीक हुए भी कई साल हो गए हैं, जिस पर हम पहले से चर्चा चाहते हैं लेकिन उन्होंने 14-15 दिनों तक इस विषय पर कुछ नहीं कहा। इसका अर्थ है कि वे नहीं चाहते थे कि चर्चा हो। हम दबाव बनाते रहे लेकिन वे नहीं आए।" 

खरने ने कहा, "दूसरी मांग यह है कि प्रधानमंत्री ने जो राम मंदिर के ट्रस्ट की स्थापना की, उन्होंने ट्रस्ट के सदस्य चुने, ट्रस्ट को चलाने की प्रक्रिया भी बताई। राम मंदिर में जिन लोगों ने चोरी की है, उन्हें सख्त से सख्त सजा होनी चाहिए और प्रधानमंत्री को इसका खुलासा करना चाहिए, लेकिन इस मांग पर भी ध्यान नहीं दिया गया। इसलिए हमने तीसरी मांग ये रखी कि वे (प्रधानमंत्री मोदी) खुद देश की जनता से माफी मांगें क्योंकि हजारों-लाखों लोग राम मंदिर में आस्था रखते हैं। ऐसी जगह पर इतनी बड़ी घटना होती है और प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा। यह पहली बार है कि ऐसे विषय पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री, दोनों ने चुप्पी साधी हुई है। हम इन तीनों विषयों पर लड़ रहे हैं। खासकर राहुल गांधी ने इन सभी मुद्दों पर हर जगह पहुंचकर अपना वक्तव्य दिया। वे इन विषयों को पहले से उठाते आए हैं।"

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