उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सीनियर लीडर हरीश रावत ने पार्टी हाईकमान को अपने तेवर दिखा दिए हैं। हरीश रावत उत्तराखंड में धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा निकाल रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस पार्टी का हाईकमान इस यात्रा के पक्ष में नहीं है। उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी कुमारी शैलजा ने हरीश रावत को चिट्ठी लिखकर यात्रा का प्रोग्राम वापस लेने को कहा लेकिन आज हरीश रावत ने जसपुर से यात्रा शुरू कर दी, उनके साथ इलेक्शन कैंपेन कमेटी के चेयरमैन प्रीतम सिंह भी हैं। आज यात्रा की शुरुआत से पहले हरीश रावत ने ट्विटर पर लिखा कि उनकी यात्रा अब रुकेगी नहीं। उन्होंने कहा कि वो लंबी बीमारी के बाद स्वस्थ होकर लौटे हैं। इसलिए लोगों के बीच धन्यवाद देने जा रहे हैं लेकिन जब उनसे कुमारी शैलजा की नाराजगी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
हरीश रावत को दिल्ली बुलाया गया
जानकारी के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान द्वारा हरीश रावत को दिल्ली बुलाया गया। रविवार को हरीश रावत दिल्ली आए और केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की। हरीश रावत से मीटिंग के बाद केसी वेणुगोपाल ने साफ-साफ कहा कि उत्तराखंड में सारे कैंपेन टॉप लीडरशिप की मंजूरी से चलाए जाएंगे। किसी के व्यक्तिगत कैंपेन या यात्रा को पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी। इसके बाद आज उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा सामने आईं। उन्होंने कहा कि हरीश रावत अगले दो तीन दिन में उनसे मिलेंगे, आमने-सामने बात होगी तो सारी चीजें साफ हो जाएंगी।
उत्तराखंड कांग्रेस में हलचल पैदा करना था- हरीश रावत
उत्तराखंड की राजनीति में हुए इस पूरे घटनाक्रम पर अब कांग्रेस नेता हरीश रावत का बयान भी सामने आ गया है। हरीश रावत ने कहा- "मैंने 10 फेज की यात्रा की योजना बनाई थी, लेकिन मुझे लगता है कि मेरी इन यात्राओं के बाद, अगर पार्टी कोई नया अभियान शुरू करती है, तो हम सब मिलकर पार्टी की ओर से बनाई गई योजना के साथ आगे बढ़ेंगे। शुरुआती मकसद उत्तराखंड कांग्रेस में हलचल पैदा करना था। मैंने वह मकसद हासिल कर लिया है। अब मुझे उन 8-10 यात्राओं की ज्यादा जरूरत नहीं लगती। लेकिन मैं देख रहा हूं कि पार्टी अपनी भविष्य की यात्राओं की क्या योजना बनाती है, और अगर पार्टी उनकी योजना बनाती है, तो हम उस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।"
हम आम जनता तक नहीं पहुंच रहे थे- हरीश रावत
हरीश रावत ने आगे कहा- "इस समय, कांग्रेस पार्टी के लिए कोई और कार्यक्रम नहीं चल रहा है, और मैं पिछले कई दिनों से देख रहा था कि हम सिर्फ SIR के मुद्दे और शायद एक-दो अन्य मामलों को लेकर ही सचिवालय जा रहे थे, लेकिन हम सड़कों, मोहल्लों, शहरों, कस्बों और ब्लॉकों में आम जनता तक नहीं पहुंच रहे थे। इसलिए, दो-तीन दिन की यात्रा के बाद, मुझे इसकी जरूरत और अहमियत का एहसास हुआ। इसका असर जमीनी स्तर पर दिखेगा।" आपको बता दें कि उत्तराखंड में हरीश रावत कांग्रेस के सबसे पुराने नेता हैं। वह तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनकी उम्र 78 साल हो चुकी है। माना जाता है कि उत्तराखंड में हरीश रावत आज भी कांग्रेस के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक हैं।
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