कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और "हर-हर महादेव" व "बम-बम भोले" के लगातार जयकारों के बीच, आज दशनामी अखाड़े से पवित्र छड़ी मुबारक को वार्षिक अमरनाथ यात्रा की आखिरी पूजा-अर्चना के लिए पवित्र अमरनाथ गुफा की ओर औपचारिक रूप से रवाना किया गया। पूजा-पाठ की रस्में सूर्योदय के समय शुरू हुईं। दशनामी अखाड़े के महंत दीपेंद्र गिरी ने वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पारंपरिक पूजा की। छड़ी निकलने से पहले अभिषेक के जरिए छड़ी मुबारक को पवित्र किया गया और पूरी पूजा-अर्चना की गई।
28 अगस्त को पवित्र गुफा पहुंचेगी छड़ी
अब इसे श्रीनगर के कई मंदिरों से होते हुए अनंतनाग जिले के ऐतिहासिक मार्तंड मंदिर ले जाया जाएगा। परंपरा के मुताबिक, 22 और 23 अगस्त को पहलगाम में लिद्दर नदी के किनारे रस्में निभाई जाएंगी। इसके बाद, यात्रा 24 अगस्त को चंदनवाड़ी और 25 अगस्त को शेषनाग पहुंचेगी। पंचतरणी में दो रात (26 और 27 अगस्त) रुकने के बाद, यह 28 अगस्त को पवित्र गुफा पहुंचेगी, जहां अंतिम रस्मों के साथ इस साल की अमरनाथ यात्रा संपन्न होगी। इसके बाद, छड़ी मुबारक को वापस दशनामी अखाड़े लाया जाएगा, जहां इसे अगले साल तक रखा जाएगा।
सावन के पहले दिन से रक्षाबंधन तक चलती है पूजा
पुरानी परंपरा के अनुसार, छड़ी पूजा सावन महीने के पहले दिन शुरू होती है और रक्षाबंधन तक चलती है। देश भर से महंत और साधु इस पवित्र प्रतीक की पूजा करने, इसे झंडों से सजाने और पहलगाम-चंदनवाड़ी रास्ते से अमरनाथ गुफा तक इसके साथ जाने के लिए इकट्ठा होते हैं। पूजा की शुरुआत पारंपरिक रूप से सावन के पहले दिन पहलगाम में लिद्दर नदी के किनारे होती है और रक्षाबंधन पर इसका समापन होता है। ऐतिहासिक रूप से, अमरनाथ यात्रा की शुरुआत छड़ी पूजा से और समापन इसकी आखिरी पूजा से माना जाता है। आज श्रीनगर से निकली छड़ी 28 अगस्त तक अपनी यात्रा जारी रखेगी। इसके बाद, छड़ी मुबारक को एक बार फिर पहलगाम में लिद्दर नदी में स्नान कराया जाएगा और दशनामी अखाड़े वापस लाया जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
सुरक्षा बलों ने इस पूरी प्रक्रिया और जुलूस की आगे की यात्रा के दौरान कड़ी निगरानी रखी है, ताकि पवित्र छड़ी सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सके और भक्त व साधु पारंपरिक रस्मों में शामिल हो सकें। इस साल, 57 दिनों की अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई। इस दौरान 4.67 लाख तीर्थयात्रियों ने 'बाबा बर्फानी' के दर्शन किए। हालांकि, खराब मौसम के कारण 8 अगस्त से यात्रा रोक दी गई थी। बारिश से रास्ते के जो हिस्से खराब हो गए हैं, उनकी मरम्मत और रखरखाव के लिए बालटाल और पहलगाम, दोनों ही रास्तों पर यात्रा रोक दी गई है। हालांकि, परंपरा के अनुसार, 22 अगस्त को 'छड़ी मुबारक' को श्रीनगर से पहलगाम होते हुए पवित्र गुफा तक ले जाया जाएगा।
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